नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2022 में एक महिला की हत्या के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है। अदालत ने यह फैसला पीड़िता के छह साल के बेटे की ‘‘स्पष्ट और विस्तार से दी गयी’’ गवाही के आधार पर सुनाया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सैयद जीशान अली वारसी ने आरोपी भरत को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी व्यक्ति पीड़िता के पति का पूर्व सहकर्मी था और एकतरफा लगाव के कारण वह उसे (पीड़िता को) परेशान कर रहा था।
अभियोजन ने बताया कि आरोपी ने 21 अप्रैल, 2022 को आरती (28) के घर में उस पर चाकू से कई वार किए थे, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
अदालत ने 19 अगस्त को दिए गए 174 पृष्ठों के फैसले में कहा कि यदि किसी बच्चे की गवाही अदालत के विश्वास पर खरी उतरती है और वह विश्वसनीय होती है तो अभियोजन पक्ष के मामले को साबित करने के लिए सिर्फ वही गवाही पर्याप्त हो सकती है।
अदालत ने कहा कि चश्मदीद बच्चे की गवाही किसी के सिखाने पर आधारित नहीं थी। उसने (चश्मदीद ने) अदालत में भरत की सही पहचान की और बताया कि आरोपी ने उसकी मां से 'घर चल' कहा था और मना करने पर उस पर चाकू से हमला कर दिया था।
अदालत ने टिप्पणी की कि पीड़िता के नाबालिग बेटे की ओर से दिया गया घटना का आंखों देखा ब्योरा यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि उसने वारदात को अपनी आंखों से देखा था। इस ब्योरे में हमले का तरीका और हथियार का जिक्र शामिल है। इस विस्तृत गवाही ने आरोपी के खिलाफ मामले को संदेह से परे स्थापित कर दिया है।
अदालत ने कहा कि बच्चे की गवाही चिकित्सकीय साक्ष्यों से पूरी तरह मेल खाती है।
अदालत ने आरोपी को हत्या और शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है तथा 11 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी।
भाषा शुभम सुरेश
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