नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित अरावली उच्चाधिकार समिति ने शीर्ष अदालत से अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा छह महीने बढ़ाने का अनुरोध किया है। समिति ने कहा है कि अरावली पर्वतमाला का ‘‘व्यापक और ठोस’’ आकलन करने के लिए उसे और समय की जरूरत है।
समिति ने 31 अगस्त को प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट में कहा है कि अरावली पर्वतमाला के संबंध में निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उसे भौगोलिक, पारिस्थितिक, भूवैज्ञानिक, जल विज्ञान संबंधी, सामाजिक-आर्थिक और संबंधित पक्षों से मिले साक्ष्यों को एक साथ जोड़ना होगा।
पच्चीस मई के आदेश के तहत गठित समिति अरावली की परिभाषा और सीमांकन को लेकर केंद्र सरकार की रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा कर रही है। समिति की अंतिम रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा 31 अगस्त थी।
समिति ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट में कहा, ‘‘समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि व्यापक और ठोस रिपोर्ट तैयार करने के लिए आवश्यक भू-स्थानिक आकलन, पारिस्थिक विश्लेषण, विशेषज्ञों की जांच, क्षेत्रीय और संबंधित पक्षों से सत्यापन तथा समग्र अध्ययन की वैज्ञानिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय जरूरी है।’’
समिति ने शीर्ष अदालत से अंतिम रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा बढ़ाकर 28 फरवरी, 2027 तक करने का अनुरोध किया।
अनुपालन रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि अरावली से जुड़े मुद्दे केवल तकनीकी सीमांकन तक सीमित नहीं हैं और इन्हें ‘‘किसी एक भू-आधारित मानदंड या किसी एक स्रोत से मिले साक्ष्य’’ के आधार पर उचित तरीके से नहीं सुलझाया जा सकता।
समिति ने कहा कि इसी वजह से ‘अरावली के व्यापक भूवैज्ञानिक, भू-आकृतिक, जल विज्ञान संबंधी, जैव-भौगोलिक, पारिस्थितिक, जैव विविधता, खनिज संसाधन और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं’ की विस्तृत जांच जरूरी है।
समिति ने अरावली क्षेत्र का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए छह अगस्त से 11 अगस्त के बीच क्षेत्रीय दौरे किए थे। इस दौरान जनसुनवाई भी आयोजित की गई थी।
समिति की अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त तक उसे इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक माध्यमों से करीब 680 सुझाव और अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे।
भाषा आशीष रंजन
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