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एनसीडब्ल्यू प्रमुख ने नंगे पैर मैराथन में जीत हासिल करने वाली महिला से सभी तरह की मदद का वादा किया

नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के बीड जिले में अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए मदद जुटाने के उद्देश्य से नंगे पैर मैराथन में हिस्सा लेने और जीत हासिल करने वाली महिला रसोइया के सुर्खियों में आने के कुछ दिन बाद राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने शुक्रवार को उससे बात की और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उसके परिवार को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।

रहाटकर ने हाल ही में उन्हें मिले एक पुरस्कार की राशि में से संबंधित महिला रमाबाई अशोक रणवीर को एक लाख रुपये देने का भी वादा किया।

रमाबाई (47) वर्ष 2012 में अपने पति की मौत के बाद दो बेटियों की अकेले देखभाल कर रही हैं। उनकी एक बेटी बैंकिंग परीक्षाओं, जबकि दूसरी पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही है।

रहाटकर ने महिला से फोन पर हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “रमाबाईजी का उदाहरण दिखाता है कि एक मां अपनी बेटियों की शिक्षा के लिए कितने दृढ़ संकल्प, साहस और समर्पण के साथ संघर्ष कर सकती है। यह बेहद प्रेरणादायक है। अपने दृढ़ संकल्प और मातृत्व की शक्ति से उन्होंने अनगिनत लोगों को प्रेरित किया है।”

तीन किलोमीटर की ‘अमृत दौड़’ नामक यह मैराथन बीड जिले के अंबाजोगाई में आयोजित की गई थी। इसका आयोजन भारतीय शिक्षण प्रसारक संस्था ने अपने खोलेश्वर शैक्षणिक परिसर की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर किया था।

विजेता के लिए तीन हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की गई थी।

रमाबाई ने कभी प्रशिक्षण नहीं लिया था। उन्होंने साड़ी पहनकर नंगे पैर दौड़ लगाई। उनके ध्यान में केवल पुरस्कार की राशि थी, ताकि उनकी बेटियों की पढ़ाई में मदद मिल सके।

उनके पास प्लास्टिक की एक जोड़ी चप्पल थी, जो ठंडी और गीली सड़क पर बार-बार फिसल रही थी। इसलिए उन्होंने चप्पल उतारकर हाथ में पकड़ ली। साड़ी का किनारा संभालते हुए उन्होंने एक-एक करके युवा प्रतियोगियों को पीछे छोड़ा और विजयी रेखा पार कर ली।

रहाटकर ने कहा, “रमाबाईजी की प्रेरणादायक कहानी सामने आने के बाद मैंने उन्हें एक पुरस्कार में मिली राशि में से एक लाख रुपये देने का फैसला किया है।”

एनसीडब्ल्यू प्रमुख ने कहा कि उन्हें कुछ महीने पहले अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की ओर से ‘आचार्य तुलसी कर्तृत्व पुरस्कार’ और नकद राशि दी गई थी।

उन्होंने कहा कि यह राशि रमाबाई के संघर्ष या उपलब्धियों की कीमत नहीं है, बल्कि “उस प्रेरणा के लिए आभार का एक छोटा सा प्रतीक है, जो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुझे और समाज के कई लोगों को दी है।”

एनसीडब्ल्यू प्रमुख ने कहा, “रमाबाईजी हिंगोली जिले के कलामनुरी तालुका की रहने वाली हैं। मैंने हिंगोली के जिलाधिकारी राहुल गुप्ता से बात की है और उन्हें जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है, ताकि रमाबाईजी और उनकी दोनों बेटियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।”

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश