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झारखंड: छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग को लेकर भाजपा आठ सितंबर को करेगी प्रदर्शन

रांची, चार सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की झारखंड इकाई के अध्यक्ष आदित्य साहू ने शुक्रवार को घोषणा की कि विभिन्न थानों में छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने की मांग को लेकर आठ सितंबर से पूरे राज्य में चार दिवसीय आंदोलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मुख्य सचिव अविनाश कुमार से मुलाकात की थी और राज्य सरकार को मामले वापस लेने के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी।

साहू ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम अब भी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं। चूंकि पार्टी ने 48 घंटे की समयसीमा दी थी और कहा था कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरेंगे, इसलिए हम अपने आंदोलन की योजना की घोषणा कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता 8 से 11 सितंबर तक सभी 24 जिलों में चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन करेंगे।’’

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि आठ सितंबर को पार्टी कार्यकर्ता रांची, दुमका, हजारीबाग, जमशेदपुर, गिरिडीह और गढ़वा के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने बताया कि नौ सितंबर को कोडरमा, साहिबगंज, बोकारो, पलामू, सिमडेगा और चाईबासा में विरोध प्रदर्शन होंगे जबकि 10 सितंबर को सरायकेला-खरसावां, पाकुड़, धनबाद, गुमला, लातेहार और चतरा के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा।

साहू ने बताया कि 11 सितंबर को रामगढ़, देवघर, लोहरदगा, खूंटी, गोड्डा और जामताड़ा जिलों में भाजपा कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम विरोध प्रदर्शन के दौरान जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के कार्यालयों का भी घेराव करेंगे और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की मांग करेंगे।’’

पिछले महीने 23 तारीख को रांची, गिरिडीह और हजारीबाग में विरोध मार्च के दौरान पुलिस और सरकारी नौकरियों के अभ्यर्थियों के बीच हुई झड़पों के बाद कम से कम छह प्राथमिकी दर्ज की गईं। इनमें करीब 50 लोगों को नामजद किया गया है जबकि 1,100 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी)और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने भारी अनियमितताओं के जरिए नौकरियां बेचीं और प्रश्न-पत्र लीक किए गए।

साहू ने आरोप लगाया, ‘‘जब छात्रों ने अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, तो राज्य भर के अलग-अलग थानों में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गईं। दिलचस्प बात यह है कि राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उन कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जिन्होंने लाठियों से छात्रों पर हमला किया था।’’

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश