रांची, चार सितंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शुक्रवार को कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है और यदि समाज से जातिवाद समाप्त हो जाए तो इसके लाभार्थी आरक्षण का लाभ छोड़ने के लिए तैयार हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलाकर कुल 49.5 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, जबकि सालाना आठ लाख रुपये से कम आय वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘अगर जाति व्यवस्था खत्म हो जाती है, तो हम आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं।’’
उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। बाद में इसका लाभ अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक भी बढ़ाया गया।
आठवले ने यहां ‘बुद्ध विश्वभारती महिला एकीकृत विश्वविद्यालय’ की आधारशिला भी रखी। यह विश्वविद्यालय बौद्ध मिशन कैंपस की ओर से स्थापित किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘लड़कियों की शिक्षा को समर्पित यह विश्वविद्यालय निस्संदेह सराहनीय पहल है।’’
भाषा रवि कांत दिलीप
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