नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने 12 जून से 31 अगस्त के बीच चलाए गए विशेष राष्ट्रव्यापी बचाव एवं पुनर्वास अभियान के दौरान बाल श्रम में लगे 3,800 से अधिक बच्चों को मुक्त कराया।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, जिलाधिकारियों, श्रम विभागों, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर आयोग ने बाल श्रम में लगे तथा मानव तस्करी और शोषण के प्रति संवेदनशील बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास के प्रयास तेज किए हैं।
‘राष्ट्रव्यापी बचाव एवं पुनर्वास’ अभियान के तहत आयोग ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर बाल श्रम और मानव तस्करी के मद्देनजर संवदेनशील स्थानों को लक्षित करके व्यापक बचाव अभियान चलाने का आग्रह किया।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बचाव अभियानों, बचाए गए बच्चों, दर्ज प्राथमिकी, पुनर्वास, परिवारों को सौंपे जाने, मुख्यधारा में शामिल करने, मुआवजे और अन्य अनुवर्ती कार्रवाई से संबंधित आंकड़े नियमित रूप से उपलब्ध कराने को कहा गया।
मंत्रालय ने बताया कि अभियान के क्रियान्वयन की निगरानी और जमीनी स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए एनसीपीसीआर ने जिला प्रशासन के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में बचाव अभियानों की समीक्षा, कामकाज में आ रही बाधाओं को दूर करने, कार्रवाई रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने तथा विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया।
आयोग ने सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों के जरिए जागरूकता अभियान भी चलाया। इसमें बाल श्रम की सूचना देने तथा बचाए गए बच्चों के पुनर्वास और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के महत्व की जानकारी दी गई।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘अभियान की निरंतर और सक्रिय निगरानी के साथ एनसीपीसीआर ने राज्य प्राधिकारियों के सहयोग से 3,800 से अधिक बच्चों को सफलतापूर्वक मुक्त कराया गया।’’
अभियान के दौरान 575 से अधिक प्राथमिकी भी दर्ज की गईं।
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अविनाश