नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तलब की गई रिपोर्ट देने में सुनवाई अदालत के बार-बार असफल रहने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ शुरुआती जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने कहा कि सुनवाई अदालत तीन बार रिपोर्ट पेश करने में नाकाम रही। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने संज्ञान लिया कि फरवरी 2020 में न्यायालय ने सुनवाई अदालत को निर्देश दिया था कि वह एक संपत्ति से प्रतिवादियों को बेदखल करने के मामले की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी करे।
पीठ ने कहा कि इस साल जनवरी में न्यायालय के संज्ञान में आया कि फरवरी 2020 के आदेश के बावजूद, सुनवाई अदालत ने मुकदमे की कार्यवाही पूरी नहीं की।
पीठ ने सुनवाई अदालत से रिपोर्ट तलब की थी जो 12 फरवरी या मार्च में नहीं भेजी गई।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस साल मार्च में, उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया था कि वह सुनवाई अदालत को तुरंत रिपोर्ट भेजने के बारे में सूचित करें।
पीठ ने 24 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘इसके बाद ही सुनवाई अदालत ने रिपोर्ट भेजी और 12 मई, 2026 को हमने निर्देश दिया कि सुनवाई की कार्यवाही अगले छह महीनों में पूरी जाए और निचली अदालत अपनी पहली स्थिति रिपोर्ट 21 अगस्त, 2026 को या उससे पहले सौंपे।’’
न्यायालय ने कहा कि उसे सुनवाई अदालत से कोई रिपोर्ट नहीं मिली।
पीठ ने कहा, ‘‘यह तीसरी बार है जब संबंधित सुनवाई अदालत इस न्यायालय द्वारा तलब की गई रिपोर्ट प्रस्तुत करने में नाकाम रही है।
पीठ ने कहा, ‘‘इन हालात में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया जाता है कि वह संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ शुरुआती जांच शुरू करें और 15 दिनों के भीतर इस न्यायालय को रिपोर्ट भेजें।’’
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर के लिए तय करते हुए कहा कि शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर वह संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने पर विचार करेगा।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश