(फोटो के साथ)
(शिरीष बी. प्रधान)
काठमांडू, चार सितंबर (भाषा) नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1,295 हो गई लेकिन इसी बीच एक अच्छी खबर भी मिली। त्रिशूली 3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में नौ दिन से फंसे दो लोगों को जिंदा बचा लिया गया।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के कारण 26 अगस्त को अचानक बाढ़ आई थी, जिसके कारण उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों व गांवों में भारी तबाही मची।
नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक नेपाल के आठ अलग-अलग जिलों से 1,293 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें चितवन जिले से 359, नवलपरासी पूर्व से 221, नवलपरासी पश्चिम से 212 और नुवाकोट से 186 शव मिले हैं। इसी तरह रसुवा से 140, गोरखा से 72, धादिंग से 65 और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं। शुक्रवार को काठमांडू के दो अलग-अलग अस्पतालों में बाढ़ के दो पीड़ितों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 1,295 हो गई।
सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम लगभग 5,000 लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए अभियान चला रही है। अब तक प्रभावित इलाकों से 13,093 लोगों को बचाया जा चुका है।
नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार, सुरंग से जिंदा बचाए गए दो लोगों की पहचान परियोजना में मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महार्जन (45) और फोरमैन संजय साह (30) के रूप में हुई है।
नेपाली सेना के प्रवक्ता राजा राम बस्नेत के अनुसार, महार्जन को काठमांडू के छावनी स्थित नेपाल आर्मी अस्पताल ले जाया गया है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं साह का नुवाकोट के त्रिशूली अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
मधेस प्रांत के सप्तरी जिले के रहने वाले साह ने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि सुरंग में फंसे रहने के दौरान उन्होंने पिछले नौ दिन से ‘हरे कृष्ण’ मंत्र का जाप किया।
उन्होंने सुरक्षित बाहर निकाले जाने के तुरंत बाद घटना के बारे में संक्षेप में केवल इतना कहा, “मैं पिछले नौ दिन से हरे कृष्ण महामंत्र का जाप कर रहा था।”
काठमांडू के रहने वाले महार्जन की पत्नी ने कहा कि उनके पति को “दूसरी जिंदगी” मिली है। महिला ने अपनी जान जोखिम में डालकर पति को बचाने वाले बचावकर्मियों का धन्यवाद किया।
काठमांडू पोस्ट ने उनकी पत्नी हीरा शोभा के हवाले से कहा, “वह दूसरी जिंदगी लेकर लौटे हैं। हम बहुत खुश हैं। हम इंतजार कर रहे थे। अब मैं अपने पति को देखने अस्पताल जा रही हूं।”
इस बीच, भारत से राहत सामग्री लेकर छठी और सातवीं उड़ानें बृहस्पतिवार रात काठमांडू पहुंचीं, जिनमें 21.5 टन राहत सामग्री थी।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “रसुवा में अचानक आई बाढ़ के बाद नेपाल के राहत प्रयासों में भारत का सहयोग जारी है। छठी और सातवीं राहत उड़ानें (सी-130जे) आज रात काठमांडू पहुंचीं, जिनमें फॉरेंसिक किट और चिकित्सा सामग्री सहित 21.5 टन राहत सामग्री है।”
उन्होंने कहा, “ये सामग्री नेपाल को सौंप दी गई है। इससे नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों को मजबूत करने और रसुवा बाढ़ से प्रभावित समुदायों की मदद करने में सहायता मिलेगी।”
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 600 बच्चे अब भी लापता हैं।
काठमांडू पोस्ट ने स्थानीय शिक्षा विकास और समन्वय इकाइयों (ईडीसीयू), स्थानीय प्रशासनों और शिक्षण संस्थानों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के हवाले से बताया कि रसुवा में करीब 280 और मध्य नेपाल के पड़ोसी नुवाकोट में 300 से 350 अन्य बच्चे अब भी लापता हैं।
नुवाकोट शिक्षा विकास और समन्वय इकाई के प्रमुख सूर्य बहादुर खत्री ने कहा, “हम लापता छात्रों का सही आंकड़ा जुटाने के लिए प्रधानाध्यापकों से लगातार संपर्क कर रहे हैं, हालांकि संचार व्यवस्था टूट जाने के कारण स्कूल प्रमुखों को सही संख्या बताने में मुश्किल हो रही है।”
उन्होंने कहा, “कुछ लापता छात्रों का पता चल गया है, लेकिन विभिन्न स्कूलों से बच्चों के लापता होने की नयी सूचनाएं लगातार आ रही हैं। हमारा अनुमान है कि जिले में कम से कम 300 छात्र लापता हैं।”
नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में ही बाढ़ आने के बाद से करीब 250 बच्चे लापता हैं। नगरपालिका की शिक्षा इकाई के स्कूल निरीक्षक नवराज सपकोटा ने यह जानकारी दी।
सपकोटा ने कहा, “जमीनी स्थिति बेहद दुखद है। कुछ मामलों में हमें ऐसे माता-पिता मिले हैं जो जीवित हैं लेकिन अपने बच्चों को नहीं खोज पा रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में जीवित छात्र अपने लापता माता-पिता को तलाश रहे हैं।”
बिदुर में 170 शिक्षण संस्थान हैं, जिनमें 142 सामुदायिक स्कूल और 28 निजी स्कूल हैं।
रसुवा में स्थानीय शिक्षा इकाई के प्रमुख दुर्गा प्रसाद सिलवाल ने कहा कि आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है, लेकिन शुरुआती रिकॉर्ड के अनुसार जिले में फिलहाल 280 छात्र लापता हैं।
आपदा का असर शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों पर भी पड़ा है। शिक्षा इकाइयों ने पुष्टि की है कि दोनों जिलों में 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी अब भी लापता हैं।
इसके अलावा तीर्थयात्रा के लिए रसुवा गए धादिंग और गोरखा के कई शिक्षक भी बाढ़ की चपेट में आ गए और लापता हैं।
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, रसुवा में 16 शिक्षक लापता हैं, जिनमें 15 सामुदायिक स्कूलों और एक निजी संस्थान के शिक्षक हैं। वहीं नुवाकोट में छह शिक्षकों के लापता होने की पुष्टि हुई है।
नीचे की ओर स्थित जिलों में बाढ़ पीड़ितों के कई शव बरामद हुए हैं, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक लापता छात्रों या पहचाने गए शिक्षकों में की सही संख्या की पुष्टि नहीं की है।
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में 22 स्कूल बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिनमें 12 संस्थान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।
इस बीच, नेपाल सरकार ने भीषण बाढ़ से प्रभावित कारोबारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है, जिसके तहत रियायत, कर्ज की पुन: संरचना और सस्ता कर्ज देने के उपाय शामिल हैं।
अधिकारियों ने आपदा में नष्ट हुई बस्तियों को दूसरी जगह बसाने का काम भी शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिन कारोबारों के व्यावसायिक वाहन, परिवहन उपकरण, संयंत्र, मशीनरी, औजार या अन्य उपकरण पूरी तरह नष्ट हो गए हैं या बह गए हैं, उन्हें बिना सीमा शुल्क दिए नए सामान आयात करने की अनुमति होगी।
यह रियायत उन सामानों पर भी लागू होगी, जिन पर सीमा शुल्क पहले ही दिया जा चुका था लेकिन गंतव्य तक पहुंचने से पहले वे नष्ट हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार, नए सामान का आयात छह महीने में किसी भी सीमा शुल्क कार्यालय के जरिए करना होगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रांतीय और स्थानीय सरकारों से भी प्रभावित कारोबारों और संपत्तियों के लिए संपत्ति और कारोबार कर, भवन निर्माण अनुमति शुल्क तथा अन्य स्थानीय शुल्कों में अस्थायी रियायत देने को कहा जाएगा।
सरकार ने नेपाल के केंद्रीय बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक को बाढ़ से प्रभावित कर्जदारों के कर्ज की पुन: संरचना या भुगतान की समय-सीमा बदलने की सुविधा देने का निर्देश दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, बीमा प्राधिकरण से भी दावों का निपटारा तेज करने को कहा गया है। इसके लिए बीमा कंपनियों को आसान प्रक्रिया के तहत सर्वेक्षक तैनात करने की अनुमति होगी। बीमा कंपनियों को शुरुआती आकलन के आधार पर अनुमानित नुकसान की 50 प्रतिशत तक राशि अग्रिम भुगतान के रूप में देनी होगी।
ये राहत उपाय ऐसे समय में आए हैं जब अधिकारी उन समुदायों के लिए लंबी अवधि की योजना तैयार कर रहे हैं, जिनके घर और बस्तियां बाढ़ में बह गई हैं।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश