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अल नीनो की स्थिति बहुत मजबूत होने का पूर्वानुमान, भारत के लिए क्या है संदेश?

नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा है कि भूमध्यरेखा के निकट प्रशांत महासागर में बनी अल नीनो की मौजूदा स्थिति आने वाले महीनों में बहुत मजबूत हो सकती है और फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है।

डब्ल्यूएमओ ने कहा कि इसका बारिश और तापमान पर बड़ा असर पड़ सकता है और बाढ़, सूखे तथा अत्यधिक गर्मी का खतरा बढ़ सकता है।

संगठन की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा, ‘‘स्पेनिश में भले ही अल नीनो का मतलब ‘बालक’ है, लेकिन इससे दुनियाभर के लोगों और अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान हो सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले से ही सूखे और बाढ़ के कारण परेशानियों एवं तबाही का सामना कर रहे हैं तथा अल नीनो के मजबूत होने के साथ इन प्रभावों के और बढ़ने की आशंका है।’’

डब्ल्यूएमओ का यह अनुमान भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के सितंबर के पूर्वानुमान के कुछ ही दिन बाद आया है।

आईएमडी ने कहा था कि अल नीनो की स्थिति अगले साल फरवरी तक बनी रह सकती है।

अल नीनो, ‘अल नीनो सदर्न ऑसिलेशन’ (ईएनएसओ) के तीन चरणों में से एक है। यह एक जलवायु संबंधी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र के तापमान में बदलाव होता है और इसके साथ ऊपर के वातावरण में भी बदलाव आते हैं।

अल नीनो के असर से धरती का तापमान गर्म होता है, जबकि इसका उलटा चरण ‘ला नीना’ आमतौर पर ठंडक लाता है। ईएनएसओ का एक सामान्य या तटस्थ चरण भी होता है।

अल नीनो की स्थिति के कारण भारत में आमतौर पर कम बारिश होती है। इसलिए 31 अगस्त को आईएमडी ने जब पुष्टि की कि अल नीनो की मौजूदा स्थिति के कारण अगस्त में भारत में कुल बारिश कम रही, तो यह आश्चर्य की बात नहीं थी।

आईएमडी के अनुसार, अगस्त में पूरे भारत में बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम रही।

इसने यह भी कहा कि यह महीना 1901 के बाद से भारत का सबसे गर्म अगस्त था और इसका एक कारण अल नीनो भी था।

आईएमडी ने सितंबर के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। लंबी अवधि का औसत (एलपीए) 91 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है।

एलपीए का मतलब किसी क्षेत्र में किसी खास अवधि, जैसे महीने या मौसम, में होने वाली बारिश का लंबे समय का औसत है। आमतौर पर यह औसत 30 से 50 साल के आंकड़ों के आधार पर निकाला जाता है।

वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर सितंबर के लिए एलपीए करीब 167.9 मिलीमीटर है।

आईएमडी ने अभी मानसून के बाद के मौसम का पूर्वानुमान जारी नहीं किया है। हालांकि, अल नीनो के मजबूत होने का मतलब सर्दी में अधिक तापमान हो सकता है। इससे स्थिति और खराब हो सकती है, क्योंकि भारत में पहले से ही सर्दी में मौसम सामान्य से अधिक गर्म दर्ज किया जा रहा है।

दिल्ली स्थित जलवायु थिंक टैंक ‘क्लाइमेट ट्रेंड्स’ के एक हालिया अध्ययन में पता लगाया कि उत्तर भारत में सर्दियों की अवधि छोटी हो रही है और फरवरी-मार्च में गर्मी बढ़ना आम होता जा रहा है।

क्लाइमेट ट्रेंड्स के अनुसार, फरवरी में तापमान तेजी से बढ़ा है और इसमें हर दशक 0.69 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। मार्च और अप्रैल में भी तापमान में क्रमशः 0.58 डिग्री और 0.66 डिग्री सेल्सियस की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश