चंडीगढ़, चार सितंबर (भाषा) पंजाब के मोहाली की एक अदालत ने 2008 के कोकीन बरामदगी मामले में धनशोधन के आरोप में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के 80 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी और उनके 77 वर्षीय सहयोगी को दोषी ठहराते हुए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायाधीश हरदीप सिंह ने तीन सितंबर को सुनाए गए आदेश में दोनों दोषियों पर 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
इस मामले के अनुसार, भारतीय वायुसेना में 29 साल तक सेवा देने वाले और जूनियर वारंट ऑफिसर (जेडब्ल्यूओ) के पद से सेवानिवृत्त हुए दारा सिंह और उनके सहयोगी गुरदर्शन सिंह के खिलाफ अगस्त 2008 में एसएएस नगर (मोहाली) पुलिस ने मामला दर्ज किया था। दोनों के पास से उस समय 50 लाख रुपये मूल्य की 1.23 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी।
पुलिस ने बैंक के दो चेक भी जब्त किए थे, जो दारा सिंह ने कथित तौर पर ‘‘उक्त मादक पदार्थ खरीदने के लिए’’ गुरदर्शन सिंह को दिए थे। इन चेकों की कुल राशि 10 लाख रुपये थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अक्टूबर 2019 में दोनों के खिलाफ पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था और अक्टूबर 2022 में आरोप पत्र दाखिल किया था। ईडी ने मादक पदार्थ और चेक को अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में चिह्नित किया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ‘‘दोनों आरोपियों के बीच हुए लेन-देन से जुड़े ये चेक अपराध से अर्जित आय माने जाएंगे और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों को खारिज किया जाता है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि दोनों आरोपियों ने पीएमएलए की धारा तीन के तहत अपराध किया है, जो धारा चार के तहत दंडनीय है। इसलिए दोनों आरोपियों को पीएमएलए की धारा चार के तहत दोषी ठहराया जाता है।’’
अदालत ने यह भी कहा कि दोनों आरोपी पिछले 13 वर्षों से पुलिस मामले में जमानत पर रहते हुए कानूनी कार्यवाही का सामना कर रहे थे, इसलिए पहले से भुगती गई हिरासत अवधि को उनकी सजा में समायोजित किया जाएगा।
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