दुर्गापुर, चार सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा नोएडा श्रमिक प्रदर्शन मामले में गिरफ्तार दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की हिरासत रद्द किए जाने से उसके पिता और माकपा कार्यकर्ता अरुण चौधरी को राहत मिली है। साथ ही उन्हें इस बात पर गर्व भी है कि उनकी बेटी ने गरीबों के लिए काम करने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का रास्ता चुना।
उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से संबंध रखने वाली 25 वर्षीय आकृति की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत को बुधवार को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि इतिहास में स्नातक आकृति की हिरासत राज्य सरकार की ओर से ‘‘गढ़ी गई कहानी’’ पर आधारित थी।
अदालत ने आदेश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में आकृति की गिरफ्तारी जरूरी नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ता अरुण चौधरी ने फोन पर 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘हम खुश और राहत महसूस कर रहे हैं। अप्रैल से अब तक हमारे परिवार ने किन परिस्थितियों का सामना किया है, यह हम ही जानते हैं।’’
अरुण चौधरी माकपा के बंगाली मुखपत्र ‘गणशक्ति’ के दक्षिण बंगाल संस्करण के प्रसार और वितरण का काम देखते हैं।
आकृति को अप्रैल में गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में रखा गया था। उसके खिलाफ 11 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं और एक महीने बाद उस पर रासुका लगाया गया था।
हालांकि, दुर्गापुर में रहने वाले उसके माता-पिता के लिए कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
चौधरी ने कहा, ‘‘आकृति को पांच मामलों में जमानत मिल चुकी है, लेकिन छह अन्य मामलों में अभी जमानत मिलनी बाकी है। हमने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील की है और उम्मीद है कि जल्द ही राहत मिलेगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।’’
उन्होंने बताया कि मेधावी छात्रा आकृति ने 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं में 95 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उच्च शिक्षा के लिए वह दिल्ली गई। उसने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक और आधुनिक इतिहास में स्नातकोत्तर की पढ़ाई प्रथम श्रेणी में पूरी की तथा बाद में एलएलबी में दाखिला लिया। वह पीएचडी की तैयारी भी कर रही थी।
चौधरी ने कहा कि परिवार को शुरुआत में उम्मीद थी कि वह संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी करेगी और एक सुरक्षित करियर चुनेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आम लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के दौरान जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, उसे देखने के बाद हमें खुशी है कि उसने यह जीवन चुना और नौकरशाह नहीं बनी।’’
माकपा कार्यकर्ता ने बताया कि फरवरी में दिल्ली की यात्रा के दौरान उन्हें अपनी बेटी की उस जिंदगी की झलक मिली, जो उसने घर से दूर बनाई थी।
चौधरी ने कहा, ‘‘मुझे पता था कि मेरी बेटी कैसी बन रही है। वह झुग्गियों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बच्चों को पढ़ाती थी। मुझे बेहद गर्व हुआ कि मेरी बेटी समाज और गरीबों की चिंता करने वाली इंसान बन गई है।’’
उन्होंने कहा कि आकृति हमेशा से वंचित तबकों के लोगों के प्रति संवेदनशील रही है।
चौधरी ने कहा, ‘‘हर कोई अपने लिए लड़ता है, लेकिन उसने उन लोगों के लिए लड़ाई लड़ी जो अपने लिए आवाज नहीं उठा सकते थे-गरीबों और भूखों के लिए।’’
उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसे लोगों के लिए आवाज उठाना अपराध माना जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाना अपराध है? क्या अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना अपराध है? मैं वामपंथी विचारधारा से जुड़ा हूं और मैंने अपना जीवन गरीबों के हितों के लिए समर्पित किया है। मेरी बेटी इसी माहौल में बड़ी हुई है।’’
चौधरी ने आरोप लगाया कि आकृति की गिरफ्तारी की सूचना परिवार को तुरंत नहीं दी गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने शुरुआती कुछ दिनों तक हमें गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी। तीन दिन तक उससे संपर्क नहीं होने के बाद हमने पूछताछ की और 11 अप्रैल के बाद हमें इसकी जानकारी मिली।’’
उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया चलने के कारण परिवार को महीनों इंतजार करना पड़ा, लेकिन अदालत के आदेश से अब उन्हें कुछ राहत मिली है।
चौधरी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने उनकी बेटी द्वारा चुने गए रास्ते ने उनके विश्वास को और मजबूत किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम अपनी बेटी को लेकर राहत महसूस कर रहे हैं और उस पर गर्व है।’’
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