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महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर विवाद के बीच कांतापुरम की अपील: ‘उकसावे’ में न आएं समर्थक

कोझिकोड (केरलम), चार सितंबर (भाषा) कथित महिला-विरोधी टिप्पणी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे इस्लामी विद्वान कांतापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार ने शुक्रवार को अपने समर्थकों से अपील की कि वे उकसावे में न आएं और ‘आध्यात्मिक चर्चाओं’ को विवादों तथा विभाजन की ओर न जाने दें।

वरिष्ठ सुन्नी विद्वान ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमें उनलोगों के निहित स्वार्थों को स्पष्ट रूप से पहचानना चाहिए, जो जानबूझकर ऐसी आध्यात्मिक चर्चाओं को विवादों और विभाजन की ओर मोड़ने की कोशिश करते हैं।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी ‘बुरी मंशाएं’ ज्ञान अर्जन को कमजोर करने और समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास करती हैं। उन्होंने अपने अनुयायियों से ऐसे प्रयासों के प्रति पूरी सतर्कता बरतने का आग्रह किया।

कांतापुरम ने समर्थकों से कहा कि वे किसी भी उकसावे का जवाब भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि परिपक्वता और समझदारी से दें।

उन्होंने कहा, ‘‘सुन्नी समुदाय की परंपरा हमेशा सभी बुराइयों का सामना अच्छाई से करने की रही है।’’ उन्होंने समर्थकों से अनुशासन और संयम के साथ आगे बढ़ने तथा अपने मूल उद्देश्यों से विचलित नहीं होने की अपील की।

यह फेसबुक पोस्ट कांतापुरम द्वारा महिलाओं से संबंधित अपनी हालिया टिप्पणी पर सफाई देने के एक दिन बाद आया है। अपनी सफाई में उन्होंने कहा था कि वह उनलोगों में शामिल नहीं हैं, जो महिलाओं को दफन करने या उन्हें घरों में बंद रखने की वकालत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई महिलाओं को शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

त्रिशूर में बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांतापुरम ने कहा था, ‘‘यह कहना सही नहीं है कि महिलाओं को दोयम दर्जा दिया गया है। हम ऐसे लोग नहीं हैं जो कहते हैं कि महिलाओं को दफन कर देना चाहिए। हर किसी को यह समझना चाहिए।’’

कांतापुरम ने कथित तौर पर महिलाओं को घरों तक सीमित रहने की बात कही थी। उनकी इस टिप्पणी को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों ने आलोचना की थी। केरलम के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कहा था कि 19वीं सदी की ऐसी सोच प्रगतिशील केरलम में स्वीकार्य नहीं है।

सतीशन की टिप्पणी पर कांतापुरम के नेतृत्व वाले सुन्नी समूह से जुड़े संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी और उनसे माफी मांगने की मांग की थी।

भाषा शोभना सुरेश

सुरेश