नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में एक और विरोध प्रदर्शन कर हिंदुत्व ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग के लिए संसद मार्ग थाने का घेराव किया। हालांकि पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि आरोपी को 72 घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया जाएगा जिसके बाद प्रदर्शनकारी वहां से हट गए।
पार्टी प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें पुलिस ने सूचित किया है कि भारद्वाज पर हत्या के प्रयास और आपराधिक धमकी के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसुचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा, जबकि पीड़ित व्यक्ति की बेटी के ऑनलाइन उत्पीड़न और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरों को लेकर एक अलग प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
भारद्वाज ने एक साक्षात्कार में 20 जुलाई को एक प्रदर्शनकारी छात्रा के पिता के साथ मारपीट करने का दावा किया था और कहा था कि इसके बावजूद वह जेल नहीं गया।
एक पुलिस सूत्र ने कहा, 'एससी/एसटी कानून जुड़ने के बाद, पीड़ित की एक और मेडिकल जांच की जाएगी। यह निर्धारित करने के लिए आगे की जांच की जाएगी कि हत्या के प्रयास की धारा के तहत आरोप लगाना आवश्यक है या नहीं।'
यह प्रदर्शन भारद्वाज के एक साक्षात्कार के सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद किया गया। खुद को 'कट्टर हिंदू' बताने वाला भारद्वाज वीडियो में यह स्वीकार करते हुए देखा गया कि उसने प्रदर्शन के दौरान निशु आज़ाद के पिता संजय कुमार की 'खोपड़ी फोड़ दी' और अपराध की गंभीरता के बावजूद वह जेल जाने से बच गया।
वीडियो में भारद्वाज को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “...क्या आपको पता है कि इस अपराध में कौन सी धारा लगती है? धारा 307 । उसे 60 टांके लगे थे। उस व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया जा रहा था। उसकी बेटी थाने के बाहर खड़ी थी और कह रही थी कि अगर उसके पिता को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी लेकिन मुझे जेल तक नहीं भेजा गया। दुनिया को यह पता होना चाहिए। मैं पूरी रात बाहर घूमता रहा।”
कॉजपा के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि दिल्ली पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे गुंडे बख्शे न जाएं।
दास ने कहा, 'स्वतंत्र भारद्वाज जैसे गुंडे जंतर -मंतर पर आए थे। क्या दिल्ली पुलिस ने उनकी पहचान नहीं की? उसने हत्या का प्रयास किया।'
उन्होंने कहा, 'दिल्ली पुलिस ने 72 घंटे में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अगर वे वादा पूरी नहीं करते हैं, तो हमें वापस आना होगा। हम छात्रों के साथ खड़े हैं।'
प्रदर्शनकारियों में कॉजपा के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका के अलावा आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
इस दौरान थाने के चारों ओर सुरक्षा बढ़ा दी गई, अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया गया और बैरिकेड लगाए गए।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस दावे का खंडन किया है कि संजय के सिर की हड्डी टूट गई थी। पुलिस ने कहा कि हाथापाई के दौरान उन्हें मामूली चोट लगी थी और उनकी शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
रांका ने आरोप लगाया कि आरोपी ने खुले तौर पर संजय के साथ मारपीट करने और उन्हें मारने की कोशिश करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं और दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के प्रभाव के कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दास ने आरोप लगाया कि जब प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, तो एक आपराधिक गिरोह के सदस्य वहां पहुंचे और हिंसा की।
उन्होंने कहा, 'प्राथमिकी दर्ज होने के बाद हम पुलिस पर दबाव बनाते रहे कि यह हत्या का प्रयास है और इसमें संबंधित धारा जोड़ी जानी चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'हमने यह भी मांग की कि एससी/एसटी अधिनियम लागू किया जाए क्योंकि वे (पीड़ित) दलित परिवार से हैं।'
प्रदर्शनकारी छात्रा निशु ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि घटना के बाद उसे गालियां और बलात्कार की धमकियां दी गईं तथा उसने मामले में एक प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी।
उसका कहना था, ‘‘मुझे बाहर निकलने में भी शर्म आ रही थी। कुछ हफ्तों तक मैं स्कूल नहीं जा सकी, मुझे लगता है कि हर कोई मेरे बारे में बात कर रहा है। मुझे उम्मीद है कि पुलिस कार्रवाई करेगी।’’
यूट्यूब पर उपलब्ध करीब एक घंटे के इस साक्षात्कार में भारद्वाज ने राजनीतिक संबंध होने का भी दावा किया।
उसने कहा, “मुझे हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त है और दूसरी बात, कपिल मिश्रा मेरे बड़े भाई हैं। वे कहते हैं कि कपिल मिश्रा ने फोन किया और मुझे छोड़ दिया गया। चिराग पासवान मेरे बड़े भाई हैं। आप कितने नेताओं को जानती हैं? क्या आप (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी को जानती हैं? मोदी जी भी मेरे बड़े भाई हैं। मुझे सभी का समर्थन प्राप्त है।”
इस पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने‘एक्स’ पर एक पोस्ट में मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या भारद्वाज ‘जेन ज़ी’तक पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दूत है?
आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना के सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद ने भी भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए पुलिस की आलोचना की।
आजाद ने कहा, 'हम सभी ने देखा है कि कैसे आरोपी सार्वजनिक रूप से टेलीविजन चैनलों पर आया और अपने खिलाफ आरोपों को स्वीकार किया। उसने कहा है कि वे पीड़िता को मारना चाहते थे, उन्होंने उस पर हमला किया और उसे चोटें आईं। फिर भी, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया।'
सांसद ने कहा, 'उन्हें बस नोटिस दिया गया और जाने दिया गया। आरोपी पीड़ित को डरा रहा है। वह ‘स्टेटस अपडेट’ डाल रहा है, देश की शांति भंग करने की धमकी दे रहा है और मुसलमानों को निशाना बना रहा है। वह सब कुछ कर रहा है जो देश के सांप्रदायिक सद्भाव और एकता को नुकसान पहुंचा सकता है।'
हालांकि पुलिस ने कहा कि भारद्वाज और एक अन्य आरोपी सूरज कुमार को घटनास्थल से ही हिरासत में लिया गया, पूछताछ की गई और नोटिस दिया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि इस मामले में आरोप-पत्र दायर किया जाएगा।
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नोमान नरेश
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