नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) सरकार ने भारत के ऊर्जा और औद्योगिक बदलाव को गति देने के लिए महत्वाकांक्षी 60,000 करोड़ रुपये की 'पीएम-सेतु' पहल के जरिए देश के कौशल परिदृश्य को बदलने में उद्योग जगत से अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया है।
'उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार क्षमता रूपांतरण' (पीएम-सेतु) योजना की परिकल्पना देश में उन्नत प्रयोगशालाओं, मशीनों और उद्योग के अनुकूल पाठ्यक्रम के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए की गई है।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने बृहस्पतिवार को भारत के ऊर्जा और औद्योगिक बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य के अनुकूल कार्यबल तैयार करने के लिए सरकारी की योजनाओं के बारे में बताया।
उन्होंने 'पावरजेन इंडिया' और 'इंडियन यूटिलिटी वीक' के साथ संयुक्त रूप से आयोजित 'भारत इलेक्ट्रिसिटी 2026' के समापन के अवसर पर कहा कि आईटीआई संकुलों का प्रबंधन करने वाली धारा आठ के तहत आने वाली कंपनियों में अब उद्योग भागीदारों की 51 प्रतिशत की नियंत्रक हिस्सेदारी होगी। इसमें अधिकांश वित्तपोषण केंद्र और राज्य सरकारें उपलब्ध कराएंगी तथा उद्योग का 17 प्रतिशत हिस्सा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत पात्र होगा।
मुखर्जी ने कहा कि यह मॉडल पाठ्यक्रम डिजाइन, प्रौद्योगिकी अपनाने और कौशल विकास को सीधे उद्योग के हाथों में सौंपता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि हमारा कार्यबल ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों की मांगों के साथ तालमेल बनाए रखे।
भाषा पाण्डेय रमण
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