कोलकाता, चार सितंबर (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जुलाई में यहां छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा द्वारा प्रदर्शित एक पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘आपत्तिजनक’’ चित्रण पर शुक्रवार को ‘‘हैरानी’’ जताई। हालांकि, अदालत ने इस मामले में दर्ज प्राथमिकी के संबंध में अभिनेत्री को गिरफ्तारी से संरक्षण दे दिया।
कथित नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में 24 जुलाई को कोलकाता की सड़कों पर कई लोगों ने प्रदर्शन किया था और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
मित्रा ने मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और एक पोस्टर हाथ में लेकर तस्वीर खिंचवाई थी। भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, पोस्टर में प्रधानमंत्री की आपत्तिजनक तस्वीर थी।
अभिनेत्री के खिलाफ कई जिलों में शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
मित्रा की ओर से प्राथमिकी रद्द करने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘इस कार्टून की प्रकृति को देखकर अदालत की अंतरात्मा को ठेस पहुंची है।’’
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने अभिनेत्री के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य से पूछा कि उन्होंने प्रधानमंत्री का ऐसा ‘‘आपत्तिजनक कार्टून’’ क्यों प्रदर्शित किया।
इस पर मित्रा के वकील ने माना कि पोस्टर वास्तव में आपत्तिजनक था, लेकिन इससे कानून के तहत कोई आपराधिक अपराध नहीं बनता।
अदालत ने निर्देश दिया कि बृहस्पतिवार तक मित्रा के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों को एक साथ जोड़कर कोलकाता के आनंदपुर थाने द्वारा उनकी जांच की जाए।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘24 दिसंबर तक इस अदालत की अनुमति के बिना याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि यह संरक्षण तभी जारी रहेगा जब मित्रा जांच में सहयोग करेंगी।
अदालत ने कहा कि मामले के संबंध में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए मित्रा को 48 घंटे का नोटिस दिया जाना चाहिए। अदालत ने पुलिस को सुनवाई की अगली तारीख 14 दिसंबर को जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया।
भाषा शोभना पवनेश
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