मथुरा (उप्र), चार सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान कृष्ण के धर्म की रक्षा और बुराई के विनाश के संदेश का जिक्र करते हुए शुक्रवार को कहा कि समाज में नफरत पैदा करने या भारत की एकता, अखंडता और आस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाली राष्ट्र-विरोधी और असामाजिक ताकतों को परिणाम भुगतने होंगे।
विपक्षी दलों पर परोक्ष हमला करते हुए उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘‘भगवान कृष्ण, भगवान राम, भगवान शिव और मां विंध्यवासिनी में आस्था रखने वाली’’ उनकी सरकार लोगों की आस्था का सम्मान कर सकती है, न कि 'बाबर और औरंगजेब का अनुसरण करने वालों' का।
जन्माष्टमी के अवसर पर अपनी मथुरा यात्रा के दूसरे दिन यहां एक सभा को संबोधित करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि लगभग 5,200 साल पहले इस स्थान पर प्रकट हुए भगवान कृष्ण की शिक्षाएं और संदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा, 'जहां भी अच्छाई की शक्तियां मौजूद हैं, उनकी हर परिस्थिति में रक्षा की जाएगी। लेकिन जहां भी राष्ट्र-विरोधी और असामाजिक ताकतें अपना सिर उठाएंगी, समाज में नफरत पैदा करेंगी या भारत की एकता, अखंडता और आस्था को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेंगी, भगवान कृष्ण ने 5,000 साल पहले ही बता दिया था कि उनका भाग्य क्या होगा।'
मुख्यमंत्री ने भगवद् गीता के श्लोक के अंश, 'परित्राणाय साधुनाम, विनाशाय च दुष्कृताम्' (धर्मियों की सुरक्षा और बुराई के विनाश के लिए) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समाज का मार्गदर्शन करता रहा है।
आदित्यनाथ ने भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का ‘पूर्ण अवतार’ बताते हुए कहा कि आर्यावर्त में 'धर्म, सत्य और न्याय' की स्थापना के लिए 5,200 साल पहले वह इस स्थान पर प्रकट हुए थे।
उन्होंने कहा कि बार-बार आक्रमणों और विभिन्न समूहों द्वारा भारत पर अपनी आस्था थोपने की कोशिशों के बावजूद ब्रज क्षेत्र ने अपनी धार्मिक विरासत और भगवान कृष्ण की स्मृतियों को संरक्षित रखा है।
उन्होंने कहा, ''कई आक्रमण हुए और कई लोगों ने भारत पर अपनी आस्था थोपने की कोशिश की, लेकिन कोई भी सनातन आस्था को मिटा नहीं सका।''
मुख्यमंत्री ने कहा, 'जिन्होंने सनातन आस्था को मिटाने का साहस किया, वे स्वयं धूल में मिल गए, लेकिन श्री कृष्ण और राधा रानी की यादें, न केवल ब्रज में, बल्कि पूरे भारत में, आज भी हमें प्रेरित करती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए उत्साहजनक वातावरण प्रदान करती हैं।'
आदित्यनाथ ने कहा कि आस्था समाज को 'उत्थान और प्रगति' की दिशा में गति की भावना देती है, जबकि नकारात्मकता रुकावट पैदा करती है और अंततः उन ताकतों का पतन होता है जो कुछ समय के लिए शक्तिशाली दिखाई दे सकती हैं।
उन्होंने कहा, 'चाहे कितनी भी शक्तिशाली या प्रभावशाली नकारात्मक शक्ति अस्थायी रूप से प्रकट होने की कोशिश करे, उसका भाग्य कंस के समान होगा और कोई भी शक्ति उसके पतन को नहीं रोक सकती।'
उन्होंने कहा कि “यह आस्था” हजारों वर्षों से सनातन परंपरा के लिए ताकत का स्रोत बनी हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत केंद्र सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह भारत की विरासत और विकास को एक साथ ला रही है।
उन्होंने कहा कि मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी समारोह में बड़ी संख्या में भक्तों का भाग लेना इसलिए संभव हो सका क्योंकि लोगों को सुरक्षा और विकास पर भरोसा है।
आदित्यनाथ ने कहा, 'युवा अपने जीवन और भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं, हर बेटी और बहन अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त है, और हर कारीगर और हस्तशिल्प उद्यमी को भरोसा है कि वे प्रगति कर सकते हैं।'
अपने राजनीतिक विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार को ‘‘भगवान कृष्ण, भगवान राम, बाबा विश्वनाथ और मां विंध्यवासिनी में विश्वास है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जिनकी आस्था बाबर और औरंगजेब में है, क्या वे आपकी आस्था का सम्मान कर सकते हैं?' उन्होंने ऐसी ताकतों पर समाज में 'जहर' फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि 'अगर ऐसी राजनीति जारी रहने दी गई तो असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी तत्वों को बढ़ावा मिल सकता है'।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'वे आपकी सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं, महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा से समझौता कर सकते हैं, किसानों की समृद्धि को कमजोर कर सकते हैं और उद्यमियों, कारीगरों तथा शिल्पकारों को फिर से असहाय बना सकते हैं।'
आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'डबल इंजन सरकार' ऐसे मंसूबों को विफल कर देगी और उन्हें सफल नहीं होने देगी।
उन्होंने अपनी सरकार के दृष्टिकोण की पिछली सरकारों से तुलना करते हुए आरोप लगाया कि पहले की सरकारें 'वोट-बैंक की चिंताओं' के कारण मथुरा जाने से बचती थीं।
उन्होंने कहा, “पहले की सरकारें यहां आने से डरती थीं क्योंकि उन्हें वोट बैंक की चिंता थी। उन्हें डर था कि अगर वे यहां आए तो लोग सवाल पूछ सकते हैं।’’
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी नीत प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए मथुरा में 2016 में हुई जवाहर बाग हिंसा का जिक्र किया।
आदित्यनाथ ने धार्मिक महत्व के स्थानों को पुनर्स्थापित करने और विकसित करने के सरकार के प्रयासों के उदाहरण के रूप में वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्विकास और अयोध्या के परिवर्तन का हवाला दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद, निर्वाचित प्रतिनिधियों के समन्वय से, क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करते हुए मथुरा-वृंदावन के विकास पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, 'हमारा प्रयास मथुरा-वृंदावन में वैसा ही माहौल बनाना है जैसा अयोध्या और काशी में बनाया गया है, ताकि भक्तों को कोई कठिनाई न हो और वे बिना किसी बाधा के अपने देवताओं के दर्शन कर सकें।'
उन्होंने कहा कि कृष्ण जन्मभूमि, वृन्दावन में बांके बिहारी मंदिर, बरसाना, नंदगांव और गोवर्धन में आने वाले भक्तों के लिए सुविधाओं की भी योजना बनाई जा रही है।
आदित्यनाथ ने कहा, ''डबल इंजन सरकार इसके लिए लगातार काम कर रही है।''
उन्होंने यह भी कहा कि त्योहार केवल धार्मिक आस्था के अवसर नहीं हैं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को उनसे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं।
भगवद गीता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का अर्जुन को संदेश था कि परिणाम की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य निभाओ।
आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी के लिए मथुरा पहुंचे भक्तों का स्वागत किया और उत्तर प्रदेश के लोगों को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार से ही जन्माष्टमी समारोह के लिए मथुरा में हैं और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।
भाषा किशोर जफर वैभव वैभव
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