नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के जीएसएलवी रॉकेट के सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए कहा कि पूरे देश को ऐसे समय में इसरो के आने वाले सभी प्रयासों की सफलता की कामना करनी चाहिए, जब 'प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश' पर इस संस्थान के मूल चरित्र को ही बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि इसरो का मनोबल बढ़ाने वाली भी साबित होगी, क्योंकि हाल के समय में इसरो को ‘‘कई तरफ से हमलों’’ का सामना करना पड़ा है।
इसरो ने शुक्रवार को इतिहास रचते हुए भू-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित होने वाले देश के पहले 'इमेजिंग' (तस्वीर लेने वाले) उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया।
भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के जरिए 2,300 किलोग्राम से अधिक वजनी उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ईओएस-05 भारत का जियोसिंक्रोनस कक्षा से प्रक्षेपित पहला ‘इमेजिंग’ उपग्रह है और इससे देश की पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी, जिन्हें वर्षों से विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष इंजीनियरों और अनुसंधानकर्ताओं पर बेहद गर्व है, जिनकी प्रतिबद्धता और प्रतिभा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लगातार नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है।’’
कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी पार्टी वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति हमेशा से प्रतिबद्ध रही है।
खरगे ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माताओं ने दूरदृष्टि के साथ देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी और वैज्ञानिकों की कई पीढ़ियों ने उल्लेखनीय उपलब्धियों के साथ इस विरासत को आगे बढ़ाया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि ‘‘यह उपलब्धि ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देश पर इसरो की भूमिका में आमूलचूल बदलाव किया जा रहा है, जो उनके अनुसार इस संस्थान के मूल चरित्र को बदल देगा।’’
रमेश ने कहा, ‘‘पूरे देश को इसरो की असाधारण दृढ़ता और मुश्किलों से उबरने की क्षमता को सलाम करना चाहिए और उसके आने वाले सभी प्रयासों की सफलता की कामना करनी चाहिए, वे प्रयास चाहे जो भी हों।’’
कांग्रेस नेता ने कहा कि इसरो ने दशकों से तमाम कठिनाइयों के बावजूद देश को गौरवान्वित किया है और इसकी उपलब्धियां देश के लिए प्रेरणास्रोत रही हैं।
रमेश का कहना है कि कुछ समय के अपेक्षाकृत शांत दौर के बाद इसरो ने शुक्रवार सुबह श्रीहरिकोटा से अपने जीएसएलवी रॉकेट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया और 2,367 किलोग्राम वजनी एक उन्नत ‘अर्थ-इमेजिंग’ उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि यह ‘‘एक और ऐतिहासिक उपलब्धि’’ है, जिससे देश की रणनीतिक क्षमताओं में और बढ़ोतरी होगी।
रमेश ने कहा कि यह इसरो का मनोबल बढ़ाने वाला भी साबित होगा क्योंकि हाल के समय में इसरो को ‘‘कई तरफ से हमलों’’ का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने इसरो के आगामी अभियानों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश को इस प्रतिष्ठित संस्थान की उपलब्धियों और उसकी मुश्किलों से उबरने की क्षमता पर गर्व है।
भाषा हक वैभव
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