कोझिकोड (केरलम), चार सितंबर (भाषा) केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन और उनकी 20 सदस्यीय मंत्रिपरिषद ने शुक्रवार को राज्य के लिए एक नया दृष्टिकोण तैयार करने के उद्देश्य से आईआईएम कोझिकोड में दो दिवसीय रणनीतिक नेतृत्व बैठक की शुरुआत की।
‘रीइमेजिनिंग केरलम’ नामक इस कार्यक्रम में राज्य का राजनीतिक नेतृत्व, आईआईएम कोझिकोड के शिक्षण संकाय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए हैं, ताकि उन मुद्दों पर चर्चा की जा सके जो राज्य के भविष्य को आकार देंगे।
उद्योग मंत्री पी. के. कुन्हालीकुट्टी ने पत्रकारों से कहा कि यह इस तरह का उनका दूसरा कार्यक्रम है। उन्होंने बताया कि 2011 में ओमन चांडी सरकार के दौरान भी इसी तरह का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम मंत्रियों के बीच समन्वय बेहतर करने में मदद करेगा और ज्ञान तथा अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘आज यहां हमारा एजेंडा ज्ञान और अनुभव साझा करना है। यहां मौजूद हर व्यक्ति के पास खुद भी काफी अनुभव है। इसका उद्देश्य आपसी तौर पर ज्ञान और अनुभव साझा करना है। इसी के अनुसार कार्यक्रम का एजेंडा भी तय किया गया है।’’
कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि मंत्री प्रबंधन कौशल भी सीखेंगे और शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा उन्नत तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर विचार करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए तकनीक का किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है? यही इस कार्यक्रम का विषय है। वे हमें अधिक सैद्धांतिक ज्ञान देंगे और हम उनके साथ अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करेंगे। इस तरह आपसी ज्ञान और अनुभव साझा करके एक नया दृष्टिकोण और नयी शुरुआत की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।’’
उन्होंने कहा कि यूडीएफ सरकार में हालांकि ज्यादातर मंत्री पहली बार मंत्री बने हैं, लेकिन उन्हें जनसेवा का अनुभव है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उन सभी के लिए एक नया अनुभव होगा।’’
श्रम मंत्री बिंदु कृष्णा ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अन्य मंत्रियों के साथ कोझिकोड की यात्रा करती हुई नजर आ रही हैं।
आईआईएम कोझिकोड ने बताया कि इस कार्यक्रम की संकल्पना उसके निदेशक प्रो. देबाशीष चटर्जी और शिक्षण संकाय के सदस्यों ने की है।
संस्थान ने कहा, ‘‘यह बैठक केरल के राजनीतिक नेतृत्व, आईआईएमके के शिक्षण संकाय और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विद्वानों को एक साथ लाती है, ताकि राज्य के भविष्य को आकार देने वाले महत्वपूर्ण विषयों पर भविष्य की दिशा को ध्यान में रखते हुए संवाद किया जा सके।’’
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देवेंद्र वैभव
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