लखनऊ, चार सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ 'स्वतः संज्ञान' लेते हुए शुरू की गई आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को किसी दूसरी पीठ के समक्ष रखने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है।
न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मुख्य न्यायाधीश या सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश से अनुमोदन लेने के बाद इस मामले को किसी दूसरी पीठ के समक्ष रखा जाये।
इस मामले को आगामी नौ सितंबर के लिये सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
अदालत द्वारा अवमानना की यह कार्यवाही गोंडा में एक दीवानी न्यायाधीश को प्रभावित करने की कोशिश के आरोपों पर 'स्वतः संज्ञान' लेते हुए शुरू की गई थी। गोंडा देवीपाटन मंडल का मुख्यालय है।
यह कार्यवाही गोंडा की दीवानी अदालत में लंबित जमीन के लगभग तीन दशक पुराने विवाद से जुड़ी है। यह विवाद 1997 में गोंडा के ज्योति विद्या मंदिर स्कूल द्वारा नगरपालिका परिषद के विरुद्ध दायर एक मुकदमे से संबंधित है।
उच्च न्यायालय ने इस मामले में स्थानांतरण आवेदन पर सुनवाई के दौरान गत 21 अगस्त को गोंडा की दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिविजन) सबीना खान और मंडलायुक्त दुर्गाशक्ति नागपाल के बीच टेलीफोन पर हुई कथित बातचीत पर कड़ी आपत्ति जताई थी। यह बातचीत न्यायाधीश की छुट्टी और उनके पास लंबित एक मामले के बारे में थी।
भाषा सं सलीम
वैभव देवेंद्र
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