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शबरिमला में ओणम साद्या को लेकर टीडीबी अध्यक्ष और देवस्वओम मंत्री के बीच मतभेद सामने आये

तिरुवनंतपुरम, तीन सितंबर (भाषा) शबरिमला में श्रद्धालुओं को ओणम साद्या (पारंपरिक भोज) परोसे जाने को लेकर त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष के जयकुमार और केरलम के देवस्वओम मंत्री के. मुरलीधरन के बीच मतभेद सामने आए हैं।

जयकुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि पारंपरिक साद्या परोसा गया था जबकि मंत्री ने दावा किया कि श्रद्धालुओं को इसके बजाय पुलाव दिया गया था।

ओणम समारोह के तीन दिनों के दौरान शबरिमला में स्वयंसेवी संगठन श्रद्धालुओं को साद्या परोसने की परंपरा का पालन करते हैं।

हाल में ऐसी खबरें सामने आईं कि तिरुवोनम के दिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को साद्या परोसा गया जबकि श्रद्धालुओं को पुलाव दिया गया।

जयकुमार ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि लगभग 3,000 लोगों को साद्या परोसा गया था।

हालांकि मुरलीधरन ने दावा किया कि श्रद्धालुओं को केवल पुलाव परोसा गया, जबकि अधिकारियों को साद्या दी गई।

जयकुमार ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘इसे ऐसी घटना बताना जिसमें बड़ी विफलता हुई, सच्चाई के विपरीत है। मैं पूरे विश्वास के साथ यह कह सकता हूं। कई लोगों ने कई लोगों को गुमराह किया है। उन्हें (मंत्री को) गलत रिपोर्ट मिली है। जो कुछ हुआ, हम उसके बारे में पूरी जानकारी दे सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई विफलता हुई है।’’

जयकुमार ने कहा कि पुलिस ने साद्या का आयोजन नहीं किया, जैसा कि वे आमतौर पर स्वेच्छा से करते थे।

उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने साद्या का आयोजन क्यों नहीं किया? क्योंकि हम उसे इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते; वे आमतौर पर स्वेच्छा से इसका आयोजन करते हैं। मेलशांति (मुख्य पुजारी) ने भी इसमें रुचि नहीं दिखाई। इन्हीं परिस्थितियों में हमने इसकी जिम्मेदारी संभाली।’’

जब पत्रकारों ने मुरलीधरन को जयकुमार के बयान के बारे में बताया, तो मंत्री ने कहा कि कई लोग तस्वीरों के साथ यह मामला उनके संज्ञान में लाये थे।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, वर्षों से चली आ रही परंपरा को क्यों तोड़ा गया? देवस्वओम बोर्ड दावे कर सकता है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं किया गया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘साद्या केवल तिरुवोनम के दिन तक ही सीमित कर दिया गया था। दूसरी बात, दो अलग-अलग प्रकार का खाना परोसा जाता हुआ देखा गया। उन्होंने मुझे चावल के ऊपर पीली कढ़ी डालने की तस्वीरें भी दिखाईं और उसे ‘पुलाव’ बताया। क्या यह गलत नहीं है? क्या ओणम साद्या इसी तरह परोसा जाना चाहिए?”

मुरलीधरन ने कहा, ‘‘उत्रादम, तिरुवोनम और अवित्तम के दिनों में साद्या परोसना हमेशा से परंपरा रही है। इसे रोककर क्या हासिल हुआ? इसलिए हमारा कहना है कि देवस्वओम बोर्ड को इसमें सुधार करना चाहिए।’’

बाद में दिन में, जयकुमार ने कहा कि मुरलीधरन के इस बयान में कुछ सच्चाई है कि शबरिमला में तिरुवोणम के दिन भक्तों को पुलाव परोसा गया था।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लिए भोजनकक्ष में 'साद्या' का आयोजन किया गया था, जबकि उस हॉल में पुलाव परोसा गया था जहां 'अन्नदानम' (मुफ़्त भोजन सेवा) हुई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘ हालांकि, चूंकि साद्या का आयोजन हो रहा था तथा इसे कुछ और लोगों को भी परोसना था, इसलिए पुलाव खाने आए लोगों में से 3,000 लोगों को हमने सद्या परोसा। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि पुलाव नहीं परोसा गया था। उस दिन भोजनकक्ष को छोड़कर कहीं भी अन्नदान के तहत साद्या नहीं परोसा गया। यह केवल भोजनकक्ष में ही परोसा गया था।’’

जयकुमार ने कहा कि मंत्री का यह कहना सही है कि पुलाव परोसा गया था।

उन्होंने कहा,‘‘जिन्हें पुलाव चाहिए था, उन्होंने पुलाव खाया और जिन्हें साद्या चाहिए था, उन्होंने सद्या खाया।’’

जब उनसे कहा गया कि साद्या खाने गए कुछ लोगों को यह भोजन नहीं मिला, तो जयकुमार ने कहा कि ऐसा संभव है।

भाषा राजकुमार रंजन

रंजन