Breaking News

स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा, जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता से मारपीट का है आरोप     |   खराब मौसम के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन प्रभावित, 9 फ्लाइट डायवर्ट     |   बिहार: 4-5 दिनों में बढ़ेगा गंगा का जलस्तर, बक्सर समेत 7 जिलों में बाढ़ का खतरा     |   एअर इंडिया ने नशे में फ्लाइट उड़ाने वाले पायलट को नौकरी से निकाला, पॉजिटिव थी जांच     |   महाराष्ट्र: रत्नागिरी में लैंडस्लाइड, रघुवीर घाट बंद; 15-20 गांवों का संपर्क टूटा     |  

भाजपा याद रखे कि युवाओं की आवाज दबाने पर जवाब देना पड़ेगा: राहुल

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार में पिछले दिनों छात्रों के प्रदर्शन में शामिल रहे कुछ युवाओं से बृहस्पतिवार को मुलाकात की और कहा कि युवाओं की आवाज दबाने वाली हर सत्ता को एक दिन जनता के सामने जवाब देना पड़ता है तथा वह दिन अब दूर नहीं है।

राहुल गांधी ने इन युवाओं के साथ मुलाकात की तस्वीर ‘एक्स’ पर साझा किया।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा याद रखे, युवाओं की आवाज़ दबाने वाली हर सत्ता को एक दिन जनता के सामने जवाब देना पड़ता है। वह दिन अब दूर नहीं है।’’

उनका कहना है कि वह बिहार के उन छात्रों और युवाओं से मिले, जिन्होंने ‘‘सिर्फ परीक्षा व्यवस्था में धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाने पर भयंकर पुलिस बर्बरता झेली।’’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठियों के साथ-साथ ‘‘एके-47 और पिस्तौल से चली गोली ने कई छात्रों को घायल कर दिया।’’

उन्होंने दावा किया कि सेना में जाकर देश की सेवा करने की ख्वाहिश रखने वाले एक युवा का पैर एके-47 से घायल कर दिया और इसके साथ ही ‘‘उनकी जिंदगी का सपना भी’’ टूट गया।

गांधी ने कहा, ‘‘ये युवा सिर्फ निष्पक्ष अवसर, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और अपने अधिकार मांग रहे थे। ऐसी मांग पर लाठियां और गोलियां चलाने की क्या जरूरत थी?’’

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी कथित बर्बरता की जिम्मेदारी केवल कुछ छोटे अधिकारियों पर डालकर सरकार बच नहीं सकती।

उनके मुताबिक, ‘‘यह कार्रवाई या तो ऊपर के आदेश का नतीजा है या फिर सत्ता की घोर नाकामी।’’

राहुल ने कहा, ‘‘बिहार सरकार कुछ भी कर ले मैं इन युवाओं के साथ खड़ा हूं। इनकी हर संभव मदद करने को तैयार हूं।’’

उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की आवाज दबाने वाली सत्ता को अंततः जनता के सामने जवाब देना पड़ता है और वह दिन अब दूर नहीं है।

भाषा हक हक रंजन

रंजन