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अमेरिका में नारीवादी की सशक्त आवाज, लेखिका और कार्यकर्ता ग्लोरिया स्टीनम का निधन

न्यूयॉर्क, तीन सितंबर (एपी) अमेरिका में महिलाओं के आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गईं और जीवनभर नारीवाद से जुड़े मुद्दों के लिए जोरदार वकालत करने वाली मशहूर लेखिका और कार्यकर्ता ग्लोरिया स्टीनम का निधन हो गया। वह 92 साल की थीं।

‘एमएस’ पत्रिका की सह-संस्थापक स्टीनम का अधिकतर जीवन कार्यकर्ता के रूप में यात्राओं में बीता, जहां उन्होंने कॉलेज परिसरों, सामुदायिक केंद्रों, रैलियों और मार्च में भाषण दिए।

स्टीनम और उनके फाउंडेशन के सोशल मीडिया पेजों के अनुसार, बुधवार को न्यूयॉर्क शहर में उनके घर पर उनका निधन हो गया।

पोस्ट में कहा गया, ‘‘ग्लोरिया की सबसे बड़ी खूबी थी दूसरों की बात सुनना और उन्हें यह महसूस कराना कि उन्हें देखा और सुना जा रहा है।’’

पोस्ट में बताया गया कि हाल के सालों में स्टीनम ने अधिकतर समय लिखते हुए और लोगों के बीच बिताया। उन्होंने अपने घर पर सैकड़ों लोगों के लिए बातचीत के सत्र (टॉकिंग सर्कल्स) भी आयोजित किए।

उन्होंने 2015 में ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा था, ‘‘आप यह फोन या इंटरनेट पर नहीं कर सकते। आपको अपनी पांचों इंद्रियों के साथ वहां मौजूद रहना होगा। यह साफ है कि जब तक हम एक ही कमरे में न हों, एक-दूसरे के साथ सहानुभूति नहीं रख सकते।’’

स्टीनम ने एक पत्रकार के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। 1963 में ह्यू हेफ़नर के 'प्लेबॉय' साम्राज्य में महिलाओं के साथ होने वाले अपमानजनक व्यवहार पर उनकी रिपोर्टिंग काफी मशहूर हुई थी।

स्टीनम ने खुद 22 साल की उम्र में एक गुप्त और गैर-कानूनी गर्भपात कराया था। उन्होंने कहा, ‘‘या तो लिंग या नस्ल से परे अपने शरीर पर हमारा नियंत्रण बराबर है, या फिर हम लोकतंत्र में नहीं जी रहे हैं।’’

वह जल्द ही एक जानी-मानी कार्यकर्ता बन गईं।

एपी वैभव माधव

माधव