(तस्वीरों के साथ)
जयपुर, दो सितंबर (भाषा) जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में बुधवार सुबह बाघ के हमले में एक महिला सफाईकर्मी की मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार मृत महिला की पहचान नागल सुसावतान की सुगना देवी के रूप में हुई है जो उद्यान में सफाई और रखरखाव का काम करती थी।
अधिकारियों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब छह-सात महिलाएं बाड़ा संख्या 16 में घास काट रही थीं, उसी दौरान बाघ ‘शिवाजी’ अचानक बाड़े में आ गया जिससे महिलाओं में अफरा-तफरी मच गई।
सुगना के साथ आई महिला कमला देवी ने बताया कि सभी महिलाएं जान बचाने के लिए भागीं, लेकिन बाघ ने सुगना की गर्दन पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
कमला ने कहा कि बाकी महिलाओं ने ‘फेंसिंग’ और पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई।
अधिकारियों के मुताबिक सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम पहुंची और बाघ को नियंत्रित कर महिला के शव को उसके कब्जे से छुड़ाया। इसके बाद ‘फेंसिंग’ और पेड़ पर चढ़ी महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
उपवन संरक्षक आशीष व्यास ने बताया कि महिलाएं जब घास काट रही थी तब वन संरक्षक हंसा ने बाड़े का गेट खोल दिया, उसे पता नहीं था कि महिलाएं अंदर मौजूद हैं।
व्यास ने कहा, “घटना के समय मौजूद लोगों के बयान लिए जा रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि सहायक वन संरक्षक को जांच सौंपी गई है।
वन विभाग के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में बाड़े के खुले रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में कथित लापरवाही की आशंका जताई है। आमतौर पर सफाई या रखरखाव से पहले बाघ को सुरक्षित स्थान में बंद किया जाता है।
आमेर के थानाधिकारी राजेंद्र गोदारा ने बताया कि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिलाएं बाड़े में कैसे पहुंचीं और सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
घटना के बाद बाड़े वाले क्षेत्र को खाली करा दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मामले की जांच की जा रही है।
हादसे की सूचना मिलते ही ग्रामीण और मृत महिला के परिजन नाहरगढ़ जैविक उद्यान पहुंच गए तथा उन्होंने प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
स्थानीय विधायक प्रशांत शर्मा और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की।
दोपहर तीन बजे ग्रामीण और परिजनों की मांग पर सहमति बनी। इसके बाद धरना समाप्त हुआ।
सहायक वन संरक्षक जितेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा, “पीड़ित परिवार को वन विभाग की ओर से दस लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को डेयरी बूथ आवंटित करवाया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।”
उन्होंने कहा,“परिवार के दो सदस्यों को संविदा पर वन विभाग में आगामी दिवस पर रोजगार दिया जाएगा।”
शेखावत ने बताया कि परिवार के सदस्यों द्वारा सरकारी नौकरी की मांग की गई है तथा वन विभाग यह मांग पत्र सरकार को भेजेगा।
सहायक वन संरक्षक ने बताया कि इस मामले में वन संरक्षक हंसा को निलंबित कर दिया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि सुगना देवी ही परिवार की मुख्य कमाने वाली थीं। उनके पति के हाथ-पैर करंट लगने के कारण झुलस गए थे।
भाषा बाकोलिया
राजकुमार
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