नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) जापान की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर ने बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दी। एजेंसी ने रेटिंग बढ़ाने के पीछे भारत की ‘मजबूत’ आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिति में सुधार को प्रमुख कारण बताया।
जेसीआर ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी और मौजूदा मूल्य पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में छह प्रतिशत से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखने की उम्मीद है।
जापान की रेटिंग एजेंसी ने कहा कि निजी खपत और सार्वजनिक निवेश के मजबूत समर्थन से भारतीय अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में करीब सात प्रतिशत की ऊंची वृद्धि दर बनाए हुए है।
एजेंसी ने कहा कि भारत सरकार ने उत्पादकता वृद्धि और आर्थिक विकास के अनुकूल नीतियों को लगातार लागू किया है। इनमें डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का विकास और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करना शामिल है। इससे देश की आर्थिक बुनियाद पहले से मजबूत हुई है।
जेसीआर ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र की वित्तीय स्थिति में सुधार का भी उल्लेख किया। इससे हाल के वर्षों में भारत की वित्तीय प्रणाली की मजबूती में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
एजेंसी ने कहा, ‘‘भारत की ठोस आर्थिक वृद्धि, वृद्धि की बुनियाद मजबूत करने वाली आर्थिक नीतियों की दक्षता और वित्तीय प्रणाली की बेहतर मजबूती को देखते हुए जेसीआर ने भारत की विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा में दीर्घकालिक जारीकर्ता साख को एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दिया है।’’
इससे पहले, जेसीआर ने भारत को ‘बीबीबी+’ रेटिंग दी थी।
एजेंसी की ‘ए’ रेटिंग वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की उच्च स्तर की निश्चितता को बताती है, जबकि ‘बीबीबी+’ पर्याप्त स्तर की निश्चितता को दर्शाती है।
पिछले महीने दो वैश्विक रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी और फिच ने भी भारत की निवेश-ग्रेड रेटिंग बरकरार रखी थी। उन्होंने भारत की गतिशील और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, नीतियों के मोर्चे पर स्थिरता तथा बुनियादी ढांचे में उच्च निवेश को इसका आधार बताया था।
भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के सात प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी।
हालांकि, जेसीआर ने भारत के समक्ष मौजूद कुछ संरचनात्मक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। इनमें राजकोषीय घाटे का ऊंचा होना, राज्यों के बीच असमानताओं को कम करने के लिए राजकोषीय हस्तांतरण व्यवस्था और चुनावों को लेकर राजकोषीय प्रबंधन की संवेदनशीलता शामिल हैं।
एजेंसी ने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार ने सब्सिडी समेत मौजूदा खर्च की वृद्धि को नियंत्रित किया है और बुनियादी ढांचे में निवेश सहित पूंजीगत व्यय को अधिक प्राथमिकता दी है। इससे राजकोषीय खर्च की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में कर्ज-जीडीपी अनुपात को 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के 56.1 प्रतिशत से कम है। सरकार का मार्च, 2031 तक इस अनुपात को 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है।
केंद्र ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत, यानी 16.96 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान रखा है। हालांकि, नई जीडीपी श्रृंखला में मौजूदा बाजार मूल्य पर जीडीपी के संशोधन के आधार पर यह लक्ष्य 4.5 प्रतिशत बैठता है।
केंद्र ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 16.09 लाख करोड़ रुपये का सकल बाजार उधारी लक्ष्य और 11.73 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध उधारी लक्ष्य रखा है।
जेसीआर के अनुसार, केंद्र का कर्ज-जीडीपी अनुपात वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में 56.1 प्रतिशत था और इसके धीरे-धीरे घटने की उम्मीद है। हालांकि, राज्यों सहित सामान्य सरकारी कर्ज और उस पर ब्याज का बोझ अब भी ऊंचा है।
एजेंसी ने कहा कि वह इस बात पर नजर रखेगी कि सरकारी पूंजीगत व्यय किस हद तक निजी निवेश को प्रोत्साहित कर सकता है और आर्थिक वृद्धि को कायम रखते हुए सरकारी खर्च पर अर्थव्यवस्था की निर्भरता को कम कर सकता है।
बाहरी क्षेत्र के मोर्चे पर जेसीआर ने कहा कि भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) नियंत्रण में है और सेवाओं के व्यापार में अधिशेष से इसे समर्थन मिल रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त है और अल्पकालिक बाहरी कर्ज से काफी अधिक है, जिससे बाहरी झटकों को लेकर भारत की स्थिति मजबूत है।
उल्लेखनीय है कि भारत का चालू खाते का घाटा जून तिमाही में बढ़कर 4.2 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 0.5 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 3.4 अरब डॉलर था। वहीं, 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729.33 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
भाषा रमण अजय
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