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ओडिशा : एमएमडीआर कानून को लेकर भाजपा, बीजद में आरोप-प्रत्यारोप

भुवनेश्वर, दो सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बीजू जनता दल (बीजद) ने एमएमडीआर कानून को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा है। भाजपा ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर ‘‘घड़ियाली आंसू’’ बहाने का आरोप लगाया, वहीं क्षेत्रीय दल ने भाजपा पर ‘‘झूठ बोलने’’ और राज्य के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

संसद ने अगस्त में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया था। इसका उद्देश्य खनिज अधिकारों और खनिज वाली भूमि पर कर लगाने के राज्यों के अधिकारों को सीमित करना है।

भाजपा की ओडिशा इकाई ने मंगलवार शाम सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘बीजद और उसके अध्यक्ष नवीन पटनायक, दोनों एमएमडीआर अधिनियम को लेकर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। पिछली बीजद सरकार की अक्षमताओं के कारण राज्य को 1.03 करोड़ लाख रुपये का नुकसान हुआ है।’’

दूसरी ओर, बीजद सांसद संतृप्त मिश्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा ओडिशा के हितों के लिए काम नहीं कर रही है।

मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘नया कानून ओडिशा समेत खनिज संपदा वाले राज्यों से खदानों और खनन भूमि पर उनके अधिकार छीनता है। यह संघीय व्यवस्था पर हमला है।’’

उन्होंने भाजपा नेताओं पर ‘‘सरेआम झूठ बोलने’’ का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने खदानों और खनिज वाली भूमि पर राज्य सरकारों के अधिकार स्थायी रूप से छीन लिए हैं।

मिश्रा ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की पीठ ने 25 जुलाई को दिए अपने फैसले में कहा था कि राज्य खदानों और खनिज वाली भूमि पर कर और शुल्क लगा सकते हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि फैसले में कहा गया था कि वर्ष 2005 से लंबित कर और शुल्क की वसूली की जा सकती है।

मिश्रा के अनुसार, इस फैसले के तहत ओडिशा को बकाया राशि के रूप में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त होने थे और राज्य के लिए सालाना अतिरिक्त 12,000 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त करने का रास्ता भी साफ हो गया था।

एक अन्य संवाददाता सम्मेलन में विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा कि वह एमएमडीआर कानून का पुरजोर विरोध करती है और उसने पूरे राज्य में आंदोलन शुरू किया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि ‘‘बीजद की गतिविधियां संवाददाता सम्मेलनों और पत्र लिखने तक सीमित हैं।’’

भाषा मनीषा देवेंद्र

देवेंद्र