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बंगाल : छह घंटे की पुलिस पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी ने कार्रवाई को बताया ‘राजनीति बदला’

कोलकाता, एक सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पिछले सप्ताह उनके कार्यालय से अनधिकृत होर्डिंग हटाए जाने के दौरान अधिकारियों के साथ कथित झड़प के मामले में मंगलवार को पुलिस द्वारा छह घंटे तक की गई पूछताछ के बाद आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार उनकी पार्टी के खिलाफ ‘राजनीतिक बदले की भावना’से कार्रवाई कर रही है।

बनर्जी ने पूछताछ के बाद शेक्सपियर सरणी पुलिस थाना के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि सरकार तृणमूल कांग्रेस को चुनिंदा तरीके से निशाना बना रही है, इसके तहत पार्टी के होर्डिंग हटाए जा रहे हैं, उसके खाते ‘फ्रीज’ किए जा रहे हैं और नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस महासचिव ने चुनौती देते हुए कहा, ‘‘अगर उन्हें लगता है कि वे झूठे मामलों के जरिए तृणमूल कांग्रेस को रोक सकते हैं, तो वे गलतफहमी में हैं। ’’

बनर्जी ने कहा, ‘‘वे मुझसे पूछताछ कर सकते हैं, लेकिन मैं भयभीत नहीं हूं, वे डरे हुए हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की यह कार्रवाई तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक मंशा से की गई कार्रवाई के तहत उनके कैमक स्ट्रीट कार्यालय से होर्डिंग हटाने के लिए लगभग 1,000 लोगों को भेजा गया था।

कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के अधिकारी और पुलिस सड़क की ओर बने लोहे के ढांचे पर लगी होर्डिंग को हटाने के लिए बनर्जी के कार्यालय परिसर में गई थी और इस दौरान झड़प हुई थी। इस संबंध में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

आरोप है कि निजी सुरक्षा गार्ड, पार्टी समर्थक और कुछ तृणमूल नेताओं ने होर्डिंग हटाने का विरोध किया और मौके पर पंहुचे पुलिस कर्मियों और नगर निकाय के अधकारियों से हाथा-पाई की। इसके बाद पुलिस ने तीन प्राथमिकी दर्ज कीं और कई लोगों को गिरफ्तार किया।

दो प्राथमिकियों में आरोपी बनाए गए बनर्जी को पुलिस के सामने पेश होने का नोटिस भेजा गया था। वह दोपहर सवा बारह बजे थाने पहुंचे, जबकि बाहर जमा तृणमूल समर्थकों ने नारेबाजी की और आरोप लगाया कि राज्य सरकार उन्हें निशाना बना रही है।

अधिकारियों के मुताबिक आरोपों में सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य निर्वहन से रोकना, गैर-कानूनी तरीके से जमा होना और महिला पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट व उनका उत्पीड़न करना शामिल है।

तृणमूल नेता ने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को ‘हिरासत में यातना’ दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हमारे एक कार्यकर्ता तारिक को गिरफ्तार किया गया और हिरासत में यातनाएं दी गईं। उसे कल जमानत मिल गई, लेकिन 12 या 13 अन्य लोग अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।’’

बनर्जी ने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए कई लोगों को पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया था और आरोप लगाया कि ‘‘कई प्रक्रियात्मक गलतियां’’ हुई हैं।

उन्होंने कहा कि पार्टी के पास ऐसे वीडियो हैं जिनसे स्पष्ट होता है कि झड़प के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।

डायमंड हार्बर के लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘हमारे कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हमला नहीं किया। बल्कि, हमारे पास ऐसी तस्वीरें हैं जिनमें पुलिसकर्मी हमारे समर्थकों को सीढ़ियों से नीचे घसीटते हुए दिख रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘सच रिकॉर्ड पर मौजूद है’’।

तृणमूल लगातार आरोप लगा रही है कि पुलिस द्वारा उसके नेताओं के खिलाफ चुनिंदा तरीके से कार्रवाई की जा रही है।

कथित झड़प के समय मौके पर मौजूद रहे और एक प्राथमिकी में नामजद तृणमूल के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने निजी सुरक्षा कर्मियों द्वारा पुलिस को रोकने की कोशिश किए जाने संबंधी खबरों को ‘‘फर्जी’’ बताया था। उन्होंने कहा था कि सुरक्षाकर्मी इमारत के प्रवेश द्वार पर ड्यूटी पर तैनात थे।

ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया था कि पुलिस एक “अवैध” नोटिस के साथ जबरन कार्यालय में घुस आई, वरिष्ठ नेताओं के साथ मारपीट की और पार्टी समर्थकों तथा कार्यालय के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया।

बनर्जी ने पुलिस की कार्रवाई को अलीपुर प्रशासनिक इमारत में हाल ही में लगी आग से भी जोड़ा और आरोप लगाया कि सरकार दूसरी घटनाओं से निपटने में वैसी तत्परता दिखाने में नाकाम रही है।

उन्होंने कहा,‘‘ चार मई को चुनाव के नतीजे घोषित होने के एक महीने के भीतर ही अलीपुर प्रशासनिक इमारत में रहस्यमय तरीके से आग लग गई... खबरों के मुताबिक, इस आग में करीब 4,000 ईवीएम, 4,000 बैलेट यूनिट और 4,000 कंट्रोल यूनिट जलकर खाक हो गईं।’’

बनर्जी ने आरोप लगाया कि उस समय अग्नि सुरक्षा संबंधी जांच की कोई मांग नहीं की गई जबकि सरकार अब तृणमूल के होर्डिंग हटाने पर ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज उनका ध्यान तृणमूल के होर्डिंग हटाने, पार्टी के बैंक खाते ‘फ्रीज’ करने, विधायकों और सांसदों को तोड़ने और पार्टी को कमजोर करने की कोशिश करने पर है।’’

तृणमूल महासचिव ने आरोप लगाया कि उनके लोकसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान लगभग 10,000 नाम हटा दिए गए थे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा यह सीट महज 400 मतों से जीती थी।

उन्होंने कहा, ‘‘एक महीने के भीतर ही, उस प्रक्रिया से जुड़ी ईवीएम आग में नष्ट हो गईं। अगर वे मशीनें आज भी मौजूद होतीं, तो मेरा मानना ​​है कि सच लोगों के सामने आ जाता।’’

राज्य सरकार की वरिष्ठ मंत्री और भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘कानून सभी के लिए समान है। अगर आप पुलिस को परेशान करते हैं और उन पर हमला करते हैं, तो आपको कानून का सामना करना ही होगा। इसमें कोई राजनीतिक बदले की भावना नहीं है।’’

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने मामले में पुलिस के रवैये पर सवाल उठाया है। अभिषेक बनर्जी और डेरेक के वकील अर्का नाग ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 के तहत नोटिस तो जारी कर दिए गए हैं लेकिन प्राथमिकी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है।

वकील ने दावा किया कि शेक्सपियर सरणी पुलिस को एक जवाबी नोटिस भेजा गया है जिसमें दलील दी गई कि प्राथमिकी की प्रति ऑनलाइन अपलोड न करना ‘यूथ बार एसोसिएशन’ मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।

उन्होंने दावा किया कि इस मामले को लेकर पुलिस को अदालत की अवमानना ​​की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

पुलिस ने घटना के समय कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय में मौजूद डेरेक को नोटिस भेज कर सोमवार को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने को कहा था लेकिन वह पेश नहीं हुए। बाद में पुलिस ने उनके घर पर एक और नोटिस भेजा, जिसमें उन्हें बुधवार को पेश होने के लिए कहा गया है।

बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें औपचारिक रूप से सूचित किए जाने से पहले ही नोटिस जारी करने की जानकारी मीडिया तक कैसे पहुंच गई।

तृणमूल नेता ने कहा, ‘‘अभी तक मुझे आधिकारिक तौर पर कोई नोटिस नहीं मिला है। खबर है कि मुझे जानकारी मिलने से पहले ही मेरे घर पर नोटिस पहुंचा दिया गया था और किसी तरह मीडिया को तुरंत ही इसके बारे में पता चल गया।’’ उन्होंने पुलिस से यह बताने को कहा कि यह जानकारी कैसे लीक हुई।

इस ताजा घटनाक्रम ने राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच तनाव का एक और मुद्दा पैदा कर दिया है। विपक्षी पार्टी इन पुलिस मामलों को अपने नेतृत्व पर दबाव बनाने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा बता रही है।

बनर्जी ने हालांकि कहा कि इन मामलों से तृणमूल कमजोर नहीं होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर उन्हें लगता है कि वे झूठे मामलों में हमें जेल भेजकर तृणमूल कांग्रेस को कुचल सकते हैं, तो वे गलतफहमी में जी रहे हैं क्योंकि जनता बेवकूफ नहीं है।’’

बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र में, ‘‘शासक कभी अंतिम निर्णय नहीं लेता बल्कि जनता फैसला लेती है।’’

भाषा धीरज माधव

माधव