नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने मंगलवार को कहा कि जुलाई में दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस ली जाएंगी और उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नड्डा की यह टिप्पणी 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में कॉजपा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के कुछ ही समय बाद आई। इसके बाद कॉजपा ने पांच सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में प्रस्तावित अपना मार्च वापस ले लिया।
नड्डा ने कहा कि 25 जुलाई को उन्होंने और उनके सहयोगी जितेंद्र सिंह ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी और उन्हें आश्वासन दिया था कि उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे तथा इस मामले में कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नड्डा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘भारत सरकार की ओर से हमने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें आश्वासन दिया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिये जाएंगे और उनके खिलाफ आगे कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी।’’
नड्डा ने मार्च रद्द करने के कॉजपा के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र ने भाजपा शासित सभी राज्यों से चर्चा की है और उन्होंने अपने-अपने क्षेत्राधिकार में कॉजपा के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस लेने का आश्वासन दिया है।
नड्डा ने कहा, ‘‘इसी भावना के साथ हमने भाजपा शासित राज्यों के साथ भी बातचीत की। अब हम अपना आश्वासन पूरा करने जा रहे हैं। हम दिल्ली में पांच सितंबर के प्रदर्शन को रद्द करने के कॉजपा के फैसले का स्वागत करते हैं।’’
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि देश के युवाओं का कल्याण और उनकी प्रगति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
कॉजपा ने केंद्र पर 25 जुलाई को किए गए उन वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए शिक्षक दिवस (पांच सितंबर) को दिल्ली में विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया था। केंद्र ने इन वादों के जरिए परीक्षा में अनियमितताओं और नीट-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ 36 दिनों से जारी आंदोलन को खत्म करने के लिए संगठन को मनाया था।
कॉजपा के अनुसार, इस मार्च का नेतृत्व उन छात्रों के परिवार करने वाले थे, जिन्होंने नीट-यूजी 2026 की परीक्षा रद्द किए जाने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। कॉजपा के अनुसार इसके अलावा, जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पुलिस की ज्यादती का सामना करने वाले लोग भी मार्च में शामिल होने वाले थे।
इससे पहले, 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व में निकाले गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हो गई थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
कई शहरों तक फैले छात्रों के इस आंदोलन में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुख थी।
जंतर-मंतर पर 20 जून को शुरू हुआ आंदोलन 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा कॉजपा की अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद समाप्त कर दिया गया था।
भाषा अमित रंजन
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