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महाराष्ट्र का शीर्ष अदालत से अनुरोध: कर्नाटक के साथ सीमा विवाद पर 2004 के मुकदमे में जल्द हो सुनवाई

नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से 2004 के उस मामले पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया, जो कर्नाटक के साथ लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद से जुड़ा है।

यह विवाद मराठी बोलने वाले लोगों के 865 गांवों और कस्बों को लेकर है, जिनका प्रशासनिक नियंत्रण अभी पड़ोसी राज्य (कर्नाटक) के पास है।

महाराष्ट्र के वकील ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से आग्रह किया कि इस मामले में सभी जरूरी दस्तावेज और दलीलें पूरी हो चुकी हैं, इसलिए अब इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।

वकील ने कहा कि मराठी भाषी लोगों के 865 गांव कर्नाटक में हैं और यह उस सिद्धांत के खिलाफ है जिसके आधार पर राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह मामले का अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसे सूचीबद्ध करने का पक्का वादा नहीं कर सकता।’’

मराठी भाषी गांवों और कस्बों में बेलगावी (बेलगाम), कारवार और निपाणी शामिल हैं और अभी इनका प्रशासन कर्नाटक के पास है।

महाराष्ट्र ने कर्नाटक के नियंत्रण और 1956 के कानून के प्रावधानों को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में एक मूल मुकदमा दायर किया था।

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत, भाषाई आधार पर राज्यों की सीमाएं फिर से तय की गई थीं। कन्नड़ भाषी लोगों की अधिकता के कारण बेलगावी को तत्कालीन मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) में शामिल किया गया था, जबकि उससे सटे मराठी भाषी इलाके महाराष्ट्र में ही रह गए थे।

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा