भोपाल, 31 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मध्यप्रदेश के भोपाल में ई-कचरे के कथित अवैज्ञानिक निपटान और उसे खुले में जलाए जाने के आरोपों की जांच के लिए सोमवार को एक समिति गठित करने का आदेश दिया। अधिकरण की भोपाल स्थित मध्य क्षेत्र पीठ ने नितिन सक्सेना की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
अर्जी में भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के कथित अनुचित निपटान और प्रसंस्करण पर चिंता जताई गई थी।
आदेश के अनुसार, समिति में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
अधिकरण ने समिति को चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
अधिकरण ने आदेश दिय कि मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समिति के समन्वय और अन्य व्यवस्थाओं के लिए नोडल एजेंसी होगी।
अधिकरण ने भोपाल के जिलाधिकारी, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और नगर निगम आयुक्त के साथ-साथ पर्यावरण, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स तथा स्वास्थ्य विभागों के प्रमुख सचिवों को भी नोटिस जारी किए।
पीठ ने कहा कि सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
मामले की सुनवाई न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की।
सक्सेना ने अर्जी में आरोप लगाया था कि भोपाल में उत्पन्न होने वाले ई-कचरे का बड़ा हिस्सा अनधिकृत कबाड़ इकाइयों में प्रसंस्कृत किया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया था कि ई-कचरे को खुले में जलाने से सीसा, पारा, कैडमियम और क्रोमियम जैसी जहरीली धातुएं तथा अन्य हानिकारक पदार्थ निकल सकते हैं, जिससे हवा, पानी और मिट्टी प्रदूषित होने के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
अर्जी में यह भी बताया या कि मध्यप्रदेश में हर साल अनुमानित 5,000 टन ई-कचरा उत्पन्न होता है, जो 2019 के मुकाबले दस गुना अधिक है।
मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।
भाषा सं दिमो जितेंद्र
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