(तस्वीर के साथ)
पटना, 31 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि राजग सरकार ‘‘सवर्ण जातियों की आशंकाओं’’ को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है और वह सुनिश्चित करेगी कि वंचित वर्गों के हितों की रक्षा से ‘‘अन्य सामाजिक समूहों का शोषण’’ न हो।
पासवान ने यह भी कहा कि अगर ऊंची जातियों को लगता है कि उन्हें न्याय की जरूरत है, तो उनकी मदद करना वह अपनी जिम्मेदारी समझेंगे।
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख ने ऊंची जातियों के नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपने समुदायों की चिंताओं को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाए हैं।
उन्होंने वादा किया कि वह अलग-अलग सामाजिक समूहों को जोड़ने वाले ‘‘एक सेतु के रूप में काम करेंगे’’।
पासवान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सबसे पिछड़े वर्गों के लिए उप-कोटा लागू करने को लेकर अपने द्वारा जताए गए विरोध से संबंधित सवाल का जवाब दे रहे थे। उनके इस विरोध की वजह से मंत्रिमंडल में उनके सहयोगी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साथ उनकी तीखी बहस छिड़ गई है।
हाजीपुर के सांसद ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक मांझी के साथ अपने मतभेद पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा, ‘‘आरक्षण के बारे में मेरी साफ राय है कि अगर किसी एक सामाजिक वर्ग की अपनी चिंताएं हैं, तो दूसरों की आशंकाओं का ध्यान रखना भी हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।’’
पासवान ने कहा, ‘‘एक ओर हमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा करनी है, लेकिन दूसरी ओर हमें ऊंची जातियों की आशंकाओं को भी दूर करना चाहिए। किसी एक जाति के हितों की रक्षा करने का नतीजा दूसरी जाति के शोषण के रूप में नहीं निकलना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने हमेशा सभी वर्गों और जातियों को साथ लेकर चलने की वकालत की है। मैंने हमेशा जाति और धर्म से ऊपर उठकर लोगों से जुड़ने की कोशिश की है। इसलिए, यदि सवर्णों को लगता है कि उन्हें न्याय की जरूरत है, तो उनकी मदद करना मैं अपनी जिम्मेदारी समझूंगा।’’
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन, मुझे हैरानी होती है कि ऊंची जातियों के नेता अपने समुदाय की चिंताओं को उतनी मज़बूती से क्यों नहीं उठा पाते, जितनी मज़बूती से मैं उस सामाजिक वर्ग की बात रखता हूँ जिसका मैं प्रतिनिधित्व करता हूँ? संविधान में ऊंची जातियों, ओबीसी, एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों के बीच बिना किसी टकराव के सभी सामाजिक समूहों की उन्नति के लिए पर्याप्त गुंजाइश है। चिराग पासवान इन सामाजिक समूहों के बीच एक सेतु का काम करेगा।’’
उनका बयान उनके दिवंगत पिता राम विलास पासवान के रुख से मेल खाता दिखता है। पासवान बिहार में अपनी पीढ़ी के सबसे बड़े दलित नेता माने जाते थे और उन्होंने साल 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) बनाकर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की थी।
फरवरी 2005 में, जब बिहार विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तो रामविलास पासवान ने-जिनकी पार्टी में ऊंची जातियों के काफी विधायक चुनकर आए थे-राजग की ओर से मुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि वह उसी गठबंधन का समर्थन करेंगे जो सत्ता के शीर्ष पद पर किसी मुस्लिम को बिठाने का वादा करेगा।
चिराग पासवान की टिप्पणी यूजीसी के नए नियमों को लेकर जारी विवाद के संदर्भ में भी अहम है। माना जा रहा है कि इन नियमों से ऊंची जातियों (जो भाजपा की मुख्य समर्थक) में नाराज़गी है। साथ ही, दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ ने भी आधार बढ़ाने की भाजपा की कोशिशों के लिए खतरा पैदा कर दिया है।
बिहार सरकार में अपनी पार्टी के कोटे से मंत्री संजय कुमार सिंह पर दिल्ली में एक होटल कर्मी से छेड़छाड़ के आरोपों पर पासवान ने कहा, ‘‘ये आरोप घिनौने हैं। मुझे नहीं पता कि असल में इसमें कौन शामिल है। लेकिन, मैं होटल से आग्रह करूंगा कि वे पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखते हुए सबूतों के साथ सामने आने में उसकी मदद करें।’’
उन्होंने कहा कि पूरी जाँच-पड़ताल के बाद दोषी को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए, ‘‘चाहे वह व्यक्ति मेरी पार्टी का हो या मेरे परिवार का ही क्यों न हो।’’
केंद्रीय मंत्री दिल्ली के लिए उड़ान में सवार होने से पहले पत्रकारों से बात कर रहे थे।
हवाई अड्डे पर मीडियाकर्मियों ने उनकी माँ रीना पासवान से बात की और पूछा कि वह अपने बेटे की शादी कब करने वाली हैं।
उन्होंने हँसते हुए कहा, ‘‘उसने साफ मना कर दिया है। इसलिए, इस मामले में, मैं कुछ नहीं कह सकती।’’
भाषा नेत्रपाल नरेश
नरेश