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नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म मामले में वडोदरा की अदालत ने 5 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई

वडोदरा, 31 अगस्त (भाषा) वडोदरा में नवरात्रि की रात एक नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के दो साल बाद यहां की विशेष पॉक्सो अदालत ने सोमवार को पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इस अपराध को “सबसे जघन्य” करार दिया।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, अदालत ने टिप्पणी की कि देवी अंबा को समर्पित नवरात्रि जैसे पर्व के दौरान सामूहिक दुष्कर्म की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

विशेष लोक अभियोजक नयन सुखदवाला ने बताया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सी.एम. पवार ने पांचों दोषियों में से हर एक पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया और सरकार को पीड़िता को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

सुखदवाला ने पत्रकारों से कहा, “अदालत ने कहा कि समाज में महिलाओं की अहम भूमिका होती है और किसी महिला या नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म एक बेहद गंभीर मामला है। अदालत ने इसे बहुत ही जघन्य घटना बताया।”

उन्होंने कहा, “अदालत ने टिप्पणी की कि देवी अंबा को समर्पित नवरात्रि जैसे पर्व के दौरान सामूहिक दुष्कर्म की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता, पेश किए गए साक्ष्य पुख्ता थे और संदेह से परे साबित होते हैं।”

दोषियों की पहचान मुमताज, अजमल, मुन्ना बंजारा, सैफ और शाहरुख के तौर पर की गई है, जिनकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है।

अदालत ने 20 अगस्त को पांचों लोगों को भारतीय न्याय संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत सामूहिक दुष्कर्म, सबूत मिटाने और डकैती के आरोपों में दोषी ठहराया।

यह वारदात चार अक्टूबर 2024 को हुई, जब पीड़िता (उस समय 16 साल की) अपने पुरुष दोस्त के साथ बाहर गई थी। यह नवरात्रि की रात थी, जब लोग शहर भर में आयोजित गरबा कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में बाहर निकलते हैं।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपियों ने उसके दोस्त को काबू में करने के बाद लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह रात करीब 11 बजे शहर के लक्ष्मीपुरा इलाके में अपने बचपन के दोस्त से मिलने गई थी। वे स्कूटी से भायली इलाके से लौट रहे थे, तभी आधी रात के करीब एक सुनसान सड़क पर दो-पहिया वाहनों पर सवार पांच लोगों ने उन्हें रोक लिया।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित का मोबाइल फोन लूटकर विश्वामित्र नदी में फेंक दिया गया था।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने कहा कि गुजरात में सरकार की ‘बेटी बचाओ’ योजना लागू है और आरोपियों द्वारा किए गए जघन्य अपराध को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

सरकारी वकील ने बताया कि इसके बाद अदालत ने पांचों आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म के लिए उम्रकैद (बाकी बची जिंदगी जेल में बिताने) की सजा सुनाई और हर एक पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अदालत ने यह भी माना कि 10 लाख रुपये का मुआवजा भले ही पीड़िता के सदमे को मिटा नहीं सकता, लेकिन यह उन्हें कुछ राहत जरूर देता है।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप