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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत मजबूती से डटा रहा, किसानों और परिवारों को सुरक्षित रखा: सीतारमण

वाशिंगटन, 30 अगस्त (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशों में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखते हुए और देश की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर मजबूती से स्थिति का सामना किया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिकागो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘इसके परिणामस्वरूप भारतीय किसानों, भारतीय परिवारों और भारत की रसद व्यवस्था को नुकसान नहीं उठाना पड़ा।’’

उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं गड़बड़ा गईं, लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण माहौल में अपने नागरिकों की रक्षा करने में सफलता हासिल की।

सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से भारत ने सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए रखी है और इस साल भी वृद्धि इसी दायरे में रहने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि यह वृद्धि कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, शुल्क संबंधी अनिश्चितताओं और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच हासिल हुई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखने के साथ-साथ घरेलू जरूरतों को समझने की भारत की क्षमता ने देश को अनिश्चित माहौल में मजबूती से आगे बढ़ने में मदद की।

राजकोषीय अनुशासन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमने एक लक्ष्य तय किया है कि 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 50 प्रतिशत के स्तर तक लाना है। इसलिए मैं उसी दिशा में काम करूंगी।’’

उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं का कर्ज अभी भी उनके जीडीपी के 200 प्रतिशत से अधिक है। भारत ने राजकोषीय घाटे को लेकर भी अनुशासन का रास्ता अपनाया है और उसने तय लक्ष्य की दिशा में प्रगति की है।

सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनके राजकोषीय अनुशासन को दुनिया ने देखा है।

क्रेडिट रेटिंग के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें सुधार हो रहा है। यह सुधार सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों में कटौती करके नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रबंधन से हो रहा है।

सीतारमण ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इसके लिए करीब 20 वर्ष ही बचे हैं।

उन्होंने कहा कि जिस गति और स्तर पर सुधार हो रहे हैं, उसके लिए अधिक समर्थन की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि देश को ऐसे प्रतिभाशाली और अनुभवी लोगों से अधिक सहयोग चाहिए, जो आगे की दिशा के लिए सुझाव दे सकें।

वित्त मंत्री ने कहा कि इसके अलावा देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूंजी के रूप में समर्थन भी बेहद जरूरी है।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय