पटना, 29 अगस्त (भाषा) दलितों के सबसे वंचित वर्गों के लिए अलग उप-श्रेणी बनाने के मुद्दे पर शनिवार को केंद्रीय मंत्रियों चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच मतभेद सामने आया। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इसे समाज को बांटने वाला कदम बताया, जबकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री मांझी ने कहा कि इससे समुदाय को फायदा होगा।
मांझी और उनके बेटे तथा बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने उप-कोटा का समर्थन किया है। इस पर पत्रकारों ने पासवान से प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कहा कि इससे 'समुदाय के भीतर विभाजन पैदा होगा।'
हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान ने कहा, “उन्हें क्रीमी लेयर की अवधारणा का समर्थन करना चाहिए और अपने-अपने पद छोड़ देने चाहिए।”
गौरतलब है कि चिराग पासवान का रुख उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान के रुख के समान है, जिन्होंने एक दशक से अधिक समय पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य में शुरू की गई अलग 'महादलित' श्रेणी का कड़ा विरोध किया था।
मुसहर समुदाय से संबंध रखने वाले मांझी का मानना रहा है कि दलितों के वंचित वर्गों को केंद्रित करके शुरू की गईं कल्याणकारी योजनाओं का पासवान परिवार द्वारा विरोध “दुसाध समुदाय के वर्चस्व को बनाए रखने के प्रयास” से जुड़ा है।
जब मांझी का ध्यान चिराग पासवान के ताजा बयान की ओर दिलाया गया तो 80 वर्षीय नेता ने कहा, “हमें नहीं, बल्कि चिराग पासवान को इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि वह उस बात को समझ नहीं पा रहे हैं जो मैं और संतोष दलितों के व्यापक हित में कह रहे हैं।”
गया से सांसद मांझी ने कहा, “यह सच्चाई है कि दलितों में कुछ ऐसी जातियां हैं जो अपेक्षाकृत ज्यादा कमजोर हैं और उनके कल्याण की जरूरत है, जो उप-श्रेणी लागू करने के बाद संभव हो सकता है। मुझे समझ नहीं आता कि यहां क्रीमी लेयर का सवाल कहां से आ जाता है।”
संतोष कुमार सुमन ने भी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कई नाराजगी भरी पोस्ट लिखीं। उन्होंने पासवान का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्हें 'छोटा भाई' कहकर संबोधित किया।
उन्होंने कहा, “मेरे छोटे भाई की पार्टी बड़ी है और संसद तथा राज्य विधानसभा में उसके पास ज्यादा संख्याबल है। उन्हें नेतृत्व करने दें और मैं भी उनके साथ इस्तीफा दे दूंगा। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि मैं न तो आरक्षण के खिलाफ बोल रहा हूं और न ही क्रीमी लेयर लागू करने के पक्ष में हूं।”
उन्होंने कहा, “कोटे के अंदर कोटा और क्रीमी लेयर बिल्कुल अलग बातें हैं। मुसहर, भुइयां, नट, डोम... इन समुदायों को अनुसूचित जातियों के बीच भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। एससी/एसटी समुदाय के भीतर किसी को भी सामंती सोच के साथ बातचीत नहीं करनी चाहिए।”
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश