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एक बीमार यूरोपीय से 7,044 मौतें : सदी भर पहले दिल्ली में ऐसे अधिसूचित हुई इन्फ्लुएंजा बीमारी

नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) शिमला से 1918 में दिल्ली आए एक बीमार यूरोपीय व्यक्ति को इन्फ्लुएंजा के शुरुआती मामलों में दर्ज किया गया था, जब यह बीमारी शहर में फैलने लगी थी। अभिलेखों के अनुसार, कुछ ही महीनों में इस बीमारी ने दिल्ली शहर में 7,044 लोगों की जान ले ली थी।

‘पीटीआई’ को दिल्ली अभिलेखागार से मिले दस्तावेजों के अनुसार, दो साल बाद, सितंबर 1920 में ब्रिटिश भारत प्रशासन ने दिल्ली में सामान्य इन्फ्लुएंजा को आधिकारिक रूप से संक्रामक रोग घोषित कर दिया।

इस अधिसूचना के बाद इन्फ्लुएंजा को पंजाब नगरपालिका अधिनियम के तहत संक्रामक रोगों से जुड़े प्रावधानों में शामिल कर लिया गया। उस समय दिल्ली का नगर प्रशासन इसी अधिनियम के तहत संचालित होता था। इसके साथ ही बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली नगरपालिका को अधिकार मिल गए।

अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल, दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार (आंतरिक चिकित्सा) डॉ. संचयन रॉय ने कहा कि आज एच1एन1 को दिल्ली के संक्रमण नियंत्रण दिशानिर्देशों के तहत रिपोर्ट किए जाने वाले संक्रमण के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन मौसमी इन्फ्लुएंजा के हर मामले की अलग-अलग सूचना देना जरूरी नहीं है।

दिल्ली अभिलेखागार में सुरक्षित 1918 की एक चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार, प्रांत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के ध्यान में आया पहला मामला एक ऐसे यूरोपीय व्यक्ति का था, जो हाल ही में शिमला (तत्कालीन सिमला) से आया था, जहां उसके परिवार के सदस्य उसी बीमारी से पीड़ित थे।

एक हफ्ते बाद, उसी घर में रहने वाला एक और यूरोपीय व्यक्ति “साफ तौर पर पहले मामले से संक्रमित” पाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर भर “चिंता या घबराहट” की कोई खास वजह नहीं थी। मरीजों को बुखार, गले में खराश और खांसी की शिकायत थी, लेकिन अक्टूबर तक मामले ज्यादा बार सामने आने लगे और वे ज्यादा गंभीर एवं जानलेवा हो गए।

दिल्ली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की 1918 की एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, अक्टूबर और नवंबर के महीनों में दिल्ली प्रांत में इन्फ्लुएंजा से 23,175 लोगों की मौत हुई थी। ‘पीटीआई’ को दिल्ली अभिलेखागार से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, इनमें से 7,044 मौत दिल्ली शहर में और 16,131 मौत ग्रामीण इलाकों में हुई थीं। वर्ष 1918-19 की इन्फ्लुएंजा महामारी भारत के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाओं में से एक थी।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश