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कपड़ा निर्यातकों ने वाणिज्य मंत्री से सूती धागे के निर्यात को नियंत्रित करने का किया आग्रह

नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) कपड़ा निर्यातकों ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से सूती धागे की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए इसके निर्यात को नियंत्रित करने की मांग की है।

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में कहा कि कच्चे कपास और सूती धागे की कीमतें आपूर्ति संबंधी दिक्कतों के कारण लगातार बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि जिनिंग मिलों के पास कपास का सीमित भंडार और आवक में कमी के कारण कपड़ा मिलें भारतीय कपास निगम (सीसीआई) की नीलामी पर अधिक निर्भर हो रही हैं।

शक्तिवेल ने कहा कि कपास की बड़ी मात्रा किसानों से व्यापारियों के पास चली गई है, जिससे बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी को बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘एईपीसी ने धागे की कीमतों में तेज वृद्धि और भारत के कपड़ा निर्यात उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सूती धागे, खासकर 20 काउंट और उससे अधिक के धागे के निर्यात को नियंत्रित करने के लिए उचित उपाय करने का आग्रह किया है।’’

शक्तिवेल ने कहा कि 2026 की शुरुआत में करीब 250 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत वाला सूती धागा अब करीब 400 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। यानी इसकी कीमत में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे कपड़ा विनिर्माण की पूरी शृंखला पर दबाव बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अन्य कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती लागत ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

पत्र में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे कपड़ा उत्पादक देशों को भारत से कपास और सूती धागे के बढ़ते निर्यात का भी उल्लेख किया गया है।

भाषा यासिर पाण्डेय

पाण्डेय