जयपुर, 28 अगस्त (भाषा) वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में बार-बार अपराध करने के आरोपी से संबंधित एक केस फाइल राजस्थान उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री से गायब हो गई है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ता को लंबित मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय का रुख करने की अनुमति दी है।
उच्चतम न्यायालय ने 10 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी।
आदेश के अनुसार, हालांकि शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करने की अनुमति दी।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में रिकॉर्ड का पता नहीं चलता है तो याचिकाकर्ता रजिस्ट्रार जनरल से संपर्क कर रिकॉर्ड की तलाश कराने और उसे उच्च न्यायालय के समक्ष पेश कराने का अनुरोध कर सकता है।
यह मामला ज्ञान चंद अग्रवाल और दो अन्य आरोपियों से संबंधित है, जिन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय का रुख किया है।
उच्चतम न्यायालय में दाखिल याचिका के अनुसार, 10 अप्रैल को राजस्थान उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री की आपराधिक शाखा से मामले को रद्द करने संबंधी याचिकाओं के रिकॉर्ड गायब पाए गए।
इसके बाद उच्च न्यायालय ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को गायब रिकॉर्ड के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में कहा गया कि 22 अप्रैल को मामले पर विचार किए जाने के समय रजिस्ट्री की ओर से पेश की गई रिपोर्ट संतोषजनक नहीं थी।
यह मामला 2023 में विशेष कार्यबल (एसओजी) द्वारा दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत कई आरोप हैं।
याचिका में अग्रवाल को ‘‘हिस्ट्रीशीटर’’ बताया गया है और कहा गया है कि राजस्थान पुलिस ने उसके खिलाफ दर्ज करीब 298 मामलों का सत्यापन किया है।
इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक प्रेस विज्ञप्ति का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि अकेले जयपुर में अग्रवाल के खिलाफ 300 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई थीं और राजस्थान पुलिस ने उसे ‘‘हिस्ट्रीशीटर’’ (आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति) घोषित किया था।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के पहले के निर्देश के बावजूद अग्रवाल जांच में शामिल नहीं हुआ और उसकी गिरफ्तारी से संरक्षण जारी रहा।
अग्रवाल मामले की केस फाइल ऐसे समय गायब हुई है जब उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश और वकीलों के संगठनों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय के कामकाज की समीक्षा हो रही है। हालांकि, अग्रवाल मामले में रिकॉर्ड का गायब होना अपने आप में इन आरोपों से किसी संबंध को साबित नहीं करता है।
भाषा
पृथ्वी रवि कांत