नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि अदालतों को ऐसे समाधान तलाशने चाहिए, जो विकास की जायज जरूरतों को नजरअंदाज किए बिना पर्यावरण की रक्षा करें।
लंदन में मार्लबोरो हाउस स्थित राष्ट्रमंडल सचिवालय में राष्ट्रमंडल राष्ट्र और राष्ट्रमंडल विधिक शिक्षा संघ (सीएलईए) द्वारा आयोजित जलवायु न्याय पर उच्च स्तरीय राष्ट्रमंडल नीति वार्ता में, सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि पर्यावरण और विकास को हमेशा ऐसे विकल्पों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए जिनमें एक को दूसरे से बेहतर या जरूरी माना जाए।
प्रधान न्यायाधीश जर्मनी और ब्रिटेन की चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
उन्होंने कहा कि आजकल, जलवायु परिवर्तन का असर महाद्वीपों तक फैला हुआ है और इसे मानसून की लय के बजाय कार्बन की मात्रा में मापा जाता है। साथ ही, यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को इस तरह प्रभावित करता है जिसकी कल्पना प्राचीन काल का कोई राजा भी नहीं कर सकता था।
प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि जो देश अभी-अभी औद्योगिक हो रहे हैं, उनसे नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ने के लिए कहा जा रहा है और जब वे काफी तेजी से ऐसा नहीं कर पाते, तो अक्सर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अदालतों को ऐसे समाधान खोजने के लिए तैयार रहना चाहिए जो विकास की जायज जरूरतों को नजरअंदाज किए बिना पर्यावरण की रक्षा करें।’’
भाषा सुभाष माधव
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