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पर्यावरणविदों ने यमुना की सेहत पर चिंता जताई, मानसून के दौरान भी नदी का जलस्तर कम

नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) दिल्ली में इस साल मानसून के दौरान यमुना नदी में पानी का बहाव तेज नहीं रहा और नदी का जलस्तर एक बार भी खतरे के निशान से ऊपर नहीं पहुंचा, जिससे पर्यावरणविदों के बीच नदी की पारिस्थितिकीय सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है।

शुक्रवार शाम 4 बजे, पुराने रेलवे पुल पर यमुना का जलस्तर 202.30 मीटर दर्ज किया गया। यह पुल नदी के बहाव और बाढ़ के संभावित खतरों पर नजर रखने के लिए एक अहम संकेतक है।

शहर के लिए चेतावनी का स्तर 204.50 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 205.33 मीटर है और नदी के किनारे निचले इलाकों से लोगों को निकालने का काम 206 मीटर पर शुरू होता है।

यमुना का जलस्तर 8 अगस्त को 204.08 मीटर तक पहुंच गया था, जो मौजूदा मानसून में सबसे ज़्यादा है, लेकिन फिर भी चेतावनी के निशान से नीचे है। अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में यमुना नदी में बाढ़ आने का कोई अनुमान नहीं है।

साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपुल के सदस्य भीम सिंह रावत ने कहा, ‘‘यह काफी अजीब बात है कि इस मानसून में यमुना में बाढ़ का कोई बड़ा दौर नहीं देखा गया। आम तौर पर, इस नदी में हर साल कम से कम एक या दो बार हल्की या मध्यम स्तर की बाढ़ आती है। लेकिन इस साल, हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से पानी का अधिकतम बहाव 65,000 क्यूसेक तक भी नहीं पहुंचा है...।’’

दिल्ली में, जहां यमुना नदी के 22 किलोमीटर के हिस्से में सीवेज, उद्योगों का कचरा और शहरों का गंदा पानी मिलता है, पर्यावरणविदों का कहना है कि मानसून में पानी का बहाव कम होने से नदी की प्रदूषकों को कम करने, तलछट को बहाने और बाढ़ के मैदानों का जल पुनर्भरण करने की प्राकृतिक क्षमता पर असर पड़ता है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप