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भारतीय मूल का ब्रिटिश दंपति नेपाल में बाढ़ के बाद से लापता

(सुदीप्तो चौधरी)

कोलकाता, 28 अगस्त (भाषा) कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गया भारतीय मूल का एक ब्रिटिश दंपति नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से पिछले चार दिन से लापता है और कोलकाता में उनके परिजन उनकी कोई खबर मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

अनल कर (56) अपनी पत्नी संयुक्ता कर (50) के साथ 18 अगस्त को नयी दिल्ली से काठमांडू पहुंचे थे और आखिरी बार उनके नेपाल-तिब्बत सीमा के पास तिमुरे में मौजूद होने का पता चला था।

दंपति के बच्चे आरात्रिका कर और शंखदीप अपने माता-पिता की कोई खबर नहीं मिलने से परेशान हैं और अपने नाना के पास रहने के लिए कोलकाता रवाना हो गए हैं। उनके नाना कोलकाता के पूर्वी छोर पर स्थित गरिया में रहते हैं।

आरात्रिका ने कहा, ‘‘हम गरिया में अपने नाना के यहां रहेंगे और फिर आगे की योजना बनाएंगे। हम नेपाल भी जा सकते हैं।’’

वेल्स के एक अस्पताल में कार्यरत 24 वर्षीय चिकित्सक आरात्रिका ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता से पिछले मंगलवार को बात की थी और इसके अगले दिन नेपाल में अचानक बाढ़ आ गई।

आरात्रिका ने कहा, ‘‘मैं उनसे संपर्क करने की लगातार कोशिश कर रही हूं, लेकिन संपर्क नहीं हो पा रहा। मां से मेरी मंगलवार को बात हुई थी लेकिन फोन कट गया, जिसके बाद उन्होंने मुझे संदेश भेजा था।’’

उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता एक ट्रैवल एजेंसी द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर की आठ दिवसीय यात्रा पर गए थे। इस समूह में 31 लोग थे, जिनमें एजेंसी के पांच कर्मचारी और ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका एवं मलेशिया के पर्यटक शामिल थे।

आरात्रिका ने कहा, ‘‘वहां पहुंचने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल और ऑनलाइन संचार मंच ‘मैसेंजर’ के जरिये हमसे संपर्क किया था लेकिन नेटवर्क संबंधी समस्या के कारण फोन बार-बार कट रहा था। मेरी मां ने मंगलवार को मेरे नाना को संदेश भेजकर बताया था कि वे जांच चौकी (नेपाल-तिब्बत सीमा पर) से 15 किलोमीटर दूर हैं।’’

आरात्रिका ने बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता का पता लगाने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें काठमांडू स्थित ब्रिटिश दूतावास से संपर्क करने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘दूतावास हमें कोई जानकारी नहीं दे सका। केवल इतना बताया गया कि दल स्थिति पर नजर रख रहे हैं और कोई जानकारी मिलने पर हमसे संपर्क किया जाएगा।’’

आरात्रिका ने ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय (एफसीडीओ) से भी संपर्क किया लेकिन वहां से भी कोई जानकारी नहीं मिली।

कोलकाता में हर गुजरते दिन के साथ परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। बेहाला में रहने वाली अनल कर की बहन झूमा मजूमदार ने कहा कि अनिश्चितता की स्थिति से परिवार बेहद परेशान है।

उन्होंने कहा, ‘‘चार दिन हो गए हैं और हमें दंपति के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि क्या करूं। मैंने अपने बीमार पिता को इस बारे में कुछ नहीं बताया था लेकिन उन्हें टेलीविजन पर खबर देखकर इसका पता चल गया। तब से वह बहुत परेशान हैं और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है।’’

अनल के रिश्तेदार सैकत सेन ने बताया कि सोशल मीडिया पर की गई उनकी पोस्ट से परिवार को आखिरी बार उनके तिमुरे में होने का पता चला था।

सेन ने कहा, ‘‘उन्होंने 26 अगस्त को सुबह आठ बजकर 10 मिनट पर तस्वीरें अपलोड की थीं। उस समय उनकी ‘लोकेशन’ तिमुरे थी। हम दोनों के फोन नंबर पर लगातार फोन कर रहे हैं लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा। हमने यहां नेपाल के वाणिज्य दूतावास से भी संपर्क करने की कोशिश की लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिल सकी।’’

इस यात्रा का आयोजन करने वाली काठमांडू स्थित ट्रैवल एजेंसी ‘कैलाश जर्नीज’ के प्रबंधक सुजय वस्ती ने कहा कि प्रभावित इलाके में आवाजाही प्रतिबंधित होने और रक्षा कर्मियों द्वारा बचाव अभियान चलाए जाने के कारण वे वहां नहीं पहुंच सके हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें कोई जानकारी नहीं है लेकिन हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि उनके जीवित बचने की संभावना बहुत कम है। चार दिन हो चुके हैं और मुझे लगता है कि शव बहकर नीचे की ओर भारत में पहुंच चुके होंगे। हम रक्षा और बचाव दलों के संपर्क में हैं।’’

काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय के संयुक्त सचिव एवं मुख्य जिला अधिकारी ईशोर राज पौडेल ने कहा, ‘‘यहां स्थिति बेहद खराब है। बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आई है जो हर जगह फैला हुआ है। हमने 450 से अधिक शव बरामद किए हैं।’’

दंपति के जीवित बचने की संभावना के बारे में पौडेल ने कहा, ‘‘इसकी संभावना बेहद कम है। दंपति का पता लगाना भी लगभग असंभव है। वे बाढ़ में बह गए होंगे।’’

हालांकि, कर भाई-बहन को अब भी अपने माता-पिता की खबर मिलने की उम्मीद है और हर गुजरता पल उनकी बैचेनी बढ़ा रहा है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं और करीब 400 अन्य चीन की ओर फंसे हुए हैं।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश