बेंगलुरु, 28 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लागू करने की मांग करने वाली केंद्र की ‘जनविरोधी’ अधिसूचना की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया जाएगा।
राजस्व और खेल मंत्री का भी दायित्व संभाल रहे परमेश्वर ने एक बयान में कहा, ‘‘मैं कर्नाटक की जनता को स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी भी परिस्थिति में रिपोर्ट को लागू नहीं किए जाने के हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।’’
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पश्चिमी घाट के 10 जिलों के 1,449 गांवों को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने वाली अधिसूचना से राज्य के लाखों परिवारों में गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘मलनाड और पश्चिमी घाट क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए हमने केंद्र के फैसले पर चर्चा करने और समाधान तलाशने का निर्णय लिया है। इसके लिए हमने विधानमंडल का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का भी फैसला किया है।’’
परमेश्वर ने कहा कि सदियों से कर्नाटक के पश्चिमी घाट में रहने वाले लोगों ने प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीते हुए और अपने आसपास के पर्यावरण का सम्मान करते हुए अपने जीवन का निर्वहन किया है।
उन्होंने कहा, “लोगों और प्रकृति के बीच यही करीबी संबंध आज भी पश्चिमी घाट की जीवन शक्ति को बनाए हुए है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लोगों को अचानक विस्थापित करने का प्रयास जीवन-विरोधी और अमानवीय दृष्टिकोण है।’’
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पश्चिमी घाट के पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट है। इसका नाम इसके अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन के नाम पर पड़ा है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है, तो उसे उन लोगों की शिकायतों और चिंताओं को सुनना चाहिए जो पीढ़ियों से पश्चिमी घाट के गांवों में रह रहे हैं।
भाषा संतोष नरेश
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