नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ ने शुक्रवार को कहा कि वह कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ का भारत में प्रकाशक नहीं है। हालांकि वह इसके प्रकाशन को लेकर उत्सकु था, लेकिन तथ्यों की जांच करना और लेखकों को सुझाव देना उसका ‘‘विशेषाधिकार और जिम्मेदारी’’ है।
वहीं, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की आत्मकथा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और मौजूदा सरकार के दौरान ‘‘चीन द्वारा भारतीय भूभाग पर किए गए कब्जे’’ से संबंधित अंश हटाने के लिए प्रकाशक पर दबाव डाला गया।
उन्होंने कहा कि यह ‘‘अभिव्यक्ति की आजादी की हत्या’’ के समान है।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने एक बयान में कहा, ‘‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में ‘बिलॉन्गिंग’ का प्रकाशक नहीं है। यह कहना परिस्थितियों की सही तरीके से प्रस्तुति नहीं है कि लेखिका द्वारा संपादकीय बदलावों को स्वीकार करने से इनकार करने के कारण पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इसे प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया।’’
कंपनी ने कहा कि वह पुस्तक प्रकाशित करने के लिए ‘‘इच्छुक और उत्सुक’’ थी, लेकिन लेखकों के साथ तथ्यों की जांच करना और उन्हें सुझाव देना प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा होने के साथ-साथ उसका ‘‘विशेषाधिकार और जिम्मेदारी’’ है।
उसने कहा, ‘‘संबंधित चर्चाओं के दौरान पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का रुख यही था कि हम पुस्तक प्रकाशित करने के लिए इच्छुक और उत्सुक बने हुए हैं। हम लेखिका के साथ हुई गोपनीय बातचीत पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।’’
पेंगुइन का यह बयान अंग्रेजी दैनिक ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि सोनिया गांधी द्वारा पांडुलिपि में संपादकीय बदलाव करने से इनकार किए जाने के बाद प्रकाशक पीछे हट गया।
अमेरिकी प्रकाशक ‘अल्फ्रेड ए. नॉफ’ ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। अल्फ्रेड ए. नॉफ, पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक प्रकाशन संस्थान है।
भारत में पुस्तक के वितरक की स्थिति हालांकि अभी स्पष्ट नहीं है। ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन के एक पेज पर पुस्तक का ई-बुक संस्करण 2,615 रुपये में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध दिखा। वेबसाइट के अनुसार, ई-बुक का प्रकाशक हार्पर कॉलिन्स यूके का एक प्रकाशन संस्थान ‘विलियम कॉलिंस’ है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि पेंगुइन की वैश्विक प्रकाशन कंपनी पुस्तक को मूल रूप में दुनियाभर में प्रकाशित करने के लिए तैयार है, जबकि भारत में इसे जारी करने से पहले बदलाव कराने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘आखिर ऐसी कौन-सी वजह या कौन-सा दबाव है कि जो दुनिया भर में छापा जा रहा है उसे भारत में नहीं छाप सकते?’’
गहलोत ने दावा किया कि ‘‘असली मुद्दा’’ यह है कि पेंगुइन इंडिया पर मोदी, आरएसएस और चीन द्वारा मोदी सरकार के दौरान भारतीय भूभाग पर कब्जे से संबंधित हिस्सों को हटाने के लिए दबाव डाला गया।’’
उन्होंने सवाल किया कि इस ‘‘सच’’ को भारत की जनता के सामने आने से क्यों रोका जा रहा है और क्या सरकार प्रकाशकों पर दबाव डालकर तथ्यों में भी बदलाव करवाएगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी मामले पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की आत्मकथा के प्रकाशन से प्रकाशक का मना करना ‘‘अत्यंत चिंता का विषय’’ है।
उन्होंने सवाल किया कि सोनिया गांधी जैसी वरिष्ठ नेता क्या लिखेंगी और क्या नहीं, यह फैसला क्या प्रकाशक करेगा और क्या प्रकाशक स्वयं ऐसा कह रहा है या उस पर किसी का दबाव है?
लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने पेंगुइन के बयान को ‘‘कमजोर’’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पेंगुइन इंडिया को ‘एग्जाम वॉरियर्स’ और आरएसएस पर कई किताबें प्रकाशित करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार में कुछ लोग इस बात से डर रहे हैं कि भारत की जनता सोनिया गांधी की किताब पढ़ेगी।
अल्फ्रेड ए. नॉफ द्वारा कुछ दिनों पहले कहा गया था कि सोनिया गांधी अपनी आत्मकथा में भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों में से एक में विवाह के बाद अपने जीवन, पति राजीव गांधी की हत्या के दुखद दौर और 2004 में प्रधानमंत्री पद अस्वीकार करने सहित कई निजी अनुभव साझा करेंगी।
सार्वजनिक रूप से अपने निजी जीवन के बारे में बहुत ही कम बात करने वालीं 79 वर्षीय सोनिया ने इस किताब में ‘‘युद्ध के बाद के इटली में अपने बचपन से लेकर अपने प्रेम-प्रसंग और उसकी वजह से भारत आने तक’’ की कहानी का वर्णन किया है।
इससे पहले जून में, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने पत्रकार और लेखक जो सैको के 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित ग्राफिक उपन्यास को ‘‘स्थानीय कानूनी, नियामकीय, वाणिज्यिक और बाजार संबंधी परिस्थितियों’’ को ध्यान में रखते हुए हटा दिया था।
खबरों में दावा किया गया था कि प्रकाशक ने ‘‘गलत मानचित्र’’ के कारण पुस्तक के वितरण से हाथ खींच लिया था और मूल प्रकाशक की ओर से ‘‘कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।’’
इस साल फरवरी में भी प्रकाशक उस समय सुर्खियों में आया था, जब उसने कहा था कि उसने पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे के संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को ‘‘प्रिंट नहीं किया’’ है। यह बयान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद में इस पुस्तक की एक कॉपी दिखाए जाने के कुछ दिन बाद आया था।
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नरेश