अगरतला, 28 अगस्त (भाषा) त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ की मौत ‘आत्महत्या जैसी’ थी।
यह बयान तब आया जब नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और धनखड़ की अस्वाभाविक मौत की जांच उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश से कराने की मांग की।
वर्ष 1994 बैच के त्रिपुरा कैडर के आईपीएस अधिकारी धनखड़ 20 जुलाई को पुलिस मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय में मृत पाए गए थे।
जब विधानसभा अध्यक्ष रामपदा जमातिया ने चौधरी को यह मुद्दा उठाने से रोकने की कोशिश की, तो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नाराज विधायक सदन में विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए और नारे लगाने लगे, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
कुछ मिनट तक गतिरोध रहा। इसके बाद मुख्यमंत्री साहा अपनी सीट से उठे और इस मामले पर बयान देने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि डीजीपी की मौत फंदे से लटकने के कारण हुई और यह आत्महत्या जैसी थी। यह रिपोर्ट मामले से जुड़े सबूतों का हिस्सा बन गई है। निष्पक्ष जांच जारी है।’’
सरकार ने डीजीपी की अस्वाभाविक मौत की गहन जांच के लिए पहले ही एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इस समिति की अध्यक्षता पश्चिम त्रिपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक नामित पाठक कर रहे हैं।
भाषा संतोष नरेश
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