नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है, जिसमें राजकीय गान ‘जयभारत जननिय तनुजाते’ को एक खास धुन और तय समय में गाने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा गया था।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति की याचिका खारिज कर दी।
कृष्णमूर्ति ने उच्च न्यायालय के एक फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें राज्य सरकार के 25 सितंबर, 2022 के आदेश को रद्द करने से इनकार किया गया था। सरकारी आदेश में ‘नाद गीते’ को मैसूर अनंतस्वामी द्वारा बनाई गई धुन में ढाई मिनट में गाने का निर्देश दिया गया था।
पीठ ने कहा कि राजकीय गान को गाने में एकरूपता जरूरी है, चाहे वह राग के मामले में हो या गाने की अवधि के मामले में।
पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “हम मानते हैं कि राजकीय गान के गायन में राग और गाने की अवधि, दोनों के संबंध में एकरूपता होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में हमें इस आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं दिखता।”
कृष्णमूर्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन वी कटारकी पेश हुए।
पांच जनवरी, 2026 के अपने फैसले में उच्च न्यायालय ने कहा था कि राज्य सरकार राजकीय गान के लिए राग तय करने में सक्षम है, खासकर तब जब इसे किसी विशेषज्ञ ने तैयार किया हो।
उच्च न्यायालय ने यह दलील भी खारिज कर दी थी कि सरकार का यह निर्देश याचिकाकर्ता के अधिकारों का उल्लंघन है।
उच्च न्यायालय ने कृष्णमूर्ति की यह दलील भी खारिज कर दी थी कि राज्य यह तय नहीं कर सकता कि राजकीय गान किस राग में गाया जाना चाहिए।
अदालत ने इस दलील को गलत बताया था।
भाषा जोहेब मनीषा
मनीषा