किसांगानी (कांगो), 28 अगस्त (एपी) कांगो में स्वास्थ्य अधिकारियों ने देश में अब तक के सबसे घातक इबोला प्रकोप को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत बृहस्पतिवार को लोगों को इबोला का टीका लगाना शुरू कर दिया।
स्वास्थ्य मंत्री रोजर कांबा ने बताया कि टीकाकरण अभियान पूर्वी कांगो के त्शोपो प्रांत की राजधानी किसांगानी में आधिकारिक रूप से शुरू किया गया।
इबोला से निपटने के अभियान में अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य लोगों को सबसे पहले टीका लगाया जा रहा है।
कांबा ने कहा, ‘‘हमने अग्रिम मोर्चे पर मौजूद लोगों, खासकर स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों के संपर्क में आए लोगों को सबसे पहले सुरक्षित करने के लिए एरवेबो टीके का इस्तेमाल करने का फैसला किया है।’’
कांगो में इबोला का प्रकोप अब तक छह प्रांतों—इतुरी, उत्तर किवु, दक्षिण किवु, त्शोपो, हाउत-उएले और बास-उएले—में फैल चुका है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार तक देश में इबोला के 5,713 पुष्ट मामले सामने आए थे और इनमें 2,744 लोगों की मौत हो चुकी थी। पुष्ट मामलों में मृत्यु दर करीब 48 प्रतिशत है।
पूर्वी कांगो में यह प्रकोप बेहद कठिन परिस्थितियों में फैल रहा है। असुरक्षा, लोगों का विस्थापन, स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल और बड़े पैमाने पर आबादी के आवागमन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि स्थिति अब भी नियंत्रण से बाहर है और यह 2014-16 के पश्चिम अफ्रीका के इबोला प्रकोप से भी आगे निकल सकता है। वह अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप था, जिसमें मुख्य रूप से गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 11,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
कांगो की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, एरवेबो टीके की 50,000 से अधिक खुराक देश को मिल चुकी हैं।
डब्ल्यूएचओ ने पिछले सप्ताह बताया था कि कांगो में इस्तेमाल के लिए एरवेबो की 70,000 खुराक को मंजूरी दी गई है।
एजेंसी के अनुसार, इनमें से करीब 50,000 खुराक अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले कर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हैं, जबकि 20,000 खुराक का इस्तेमाल एक चिकित्सकीय परीक्षण में किया जाएगा। इस परीक्षण के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि यह टीका बुंदिबुग्यो प्रकार के इबोला वायरस से कितना बचाव करता है।
मौजूदा प्रकोप बुंदिबुग्यो प्रकार के इबोला वायरस के कारण है। हालांकि, एरवेबो को एक अलग प्रकार के वायरस—जायरे इबोलावायरस—से बचाव के लिए मंजूरी मिली है। बुंदिबुग्यो इबोला के लिए फिलहाल कोई विशेष रूप से स्वीकृत टीका उपलब्ध नहीं है।
एपी मनीषा रंजन
रंजन