नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) नेपाल में दोबारा अचानक बाढ़ आने का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि जिस हिमस्खलन से संभवत: यह बाढ़ आई थी, उसका मलबा नदियों के संगम पर जमा हो रहा है, जिससे एक अस्थायी बांध बन रहा है। आईसीआईएमओडी में वरिष्ठ क्रायोस्फीयर विशेषज्ञ मोहम्मद फारूक आजम ने ये चेतावनी दी है।
‘क्रायोस्फीयर’ शब्द पृथ्वी की सतह के उन हिस्सों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो बर्फ से ढके होते हैं।
शुक्रवार तक, नेपाल और तिब्बत में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 470 से ज्यादा हो गई है, और लगभग 1,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
काठमांडू के नजदीक स्थित अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) के शोधकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या ज्यादा ऊंचाई वाली जगह से शुरू हुआ हिमस्खलन अचानक आई बाढ़ का कारण हो सकता है?
आजम ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से कहा, ‘‘यह घटना मूल रूप से ग्लेशियर टूटने से हुई। मौजूदा समझ के अनुसार, इसमें आधारभूत चट्टान का एक हिस्सा अपनी जगह से अलग हो गया यानी ग्लेशियर के नीचे मौजूद चट्टान अपनी स्थिति से अलग होकर घाटी में नीचे आ गई, जिससे यह आपदा हुई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अचानक आई बाढ़ के साथ नीचे आया यह मलबा अब नदी के संगम स्थल पर भी जमा हो रहा है, जहां फिलहाल अस्थायी बांध बन गया है। इस बांध के कारण पानी जमा हो रहा है और अनुमान है कि अगले तीन दिनों में इस अस्थायी जलाशय या झील में और अधिक पानी जमा होगा। इसलिए इस घाटी में दोबारा अचानक बाढ़ आने की आशंका है।’’
आजम ने कहा कि यह भी हो सकता है कि इस झील के किनारे धीरे-धीरे टूटें और पानी अचानक बाढ़ लाए बिना निकल जाए।
फरवरी 2021 में उत्तराखंड के चमोली में आई अचानक बाढ़ जैसी स्थिति का जिक्र करते हुए आजम ने कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि यह वैसी ही स्थिति है, जैसी चमोली में हुई थी, जब मलबे का एक बड़ा हिस्सा नीचे आया और कुछ समय के लिए ऋषिगंगा नदी का बहाव रोक दिया था।’’
नेपाल ने अचानक आई बाढ़ से पहले से प्रभावित इलाके में पानी का स्तर बढ़ने के बाद बाढ़ की नयी चेतावनी जारी की है। नेपाल ने कहा है कि उसी जगह पर पानी का स्तर बढ़ने से इलाके में एक और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
भाषा शफीक मनीषा
मनीषा