मांड्या (कर्नाटक), 28 अगस्त (भाषा) मांड्या जेल के करीब 80 कैदियों के हस्ताक्षर वाली बताई जा रही एक अर्जी सामने आई है जिसमें जेल के भीतर विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वसूली जाने वाली कथित रकम की सूची दी गई है।
कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (जेल) आलोक कुमार ने कहा कि अर्जी में किए गए दावों की पुष्टि की जा रही है।
कैदियों के हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और विचाराधीन कैदियों के नंबर वाली इस अर्जी में विभिन्न सुविधाओं के लिए कथित ‘रेट लिस्ट’ दी गई है। इसमें अलग-अलग बैरकों में रहने के लिए हर महीने किए जाने वाले भुगतान का भी उल्लेख है।
अर्जी के मुताबिक, सेल-एक के लिए 10,000 रुपये, सेल-तीन और सेल-चार के लिए 15,000-15,000 रुपये, सेल-पांच के लिए 5,000 रुपये और सेल-छह के लिए 8,000 रुपये प्रति माह लिए जाते हैं। इसमें कमरा बदलने के लिए 2,000 रुपये और सजा वाली कोठरी से बाहर आने के लिए 10,000 रुपये देने का भी उल्लेख है।
अर्जी में यह भी आरोप लगाया गया है कि रकम देने पर कैदियों के लिए खाने-पीने की पसंदीदा चीजों की व्यवस्था की जा सकती थी जिसमें मटन के लिए 1,250 रुपये और चिकन के लिए 700 रुपये प्रति किलोग्राम की दर बताई गई है।
इसमें यह आरोप भी लगाया गया है कि रकम देने से इनकार करने वाले कैदियों को यह कहकर धमकाया जाता है कि ‘‘फांसी पर लटका दिया जाएगा।’’
कैदियों द्वारा लिखी गई बताई जा रही इस अर्जी पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोक कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उन्होंने खुद मांड्या जेल का दौरा किया था और कैदियों से बातचीत की थी।
कुमार ने कहा, ‘‘मैं खुद मंगलवार को मांड्या गया था और हर कैदी से बात की है। मेरे सामने किसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। हालांकि, अब सामने आई कथित अर्जी की सामग्री की फिर से पुष्टि की जा रही है। उनसे एक अलग कागज पर यह कहकर हस्ताक्षर कराए गए थे कि वे कैंटीन की सुविधाओं के लिए अर्जी लिख रहे हैं।’’
डीजीपी (जेल) ने हाल में मांड्या जेल का निरीक्षण उन आरोपों के बाद किया था, जिनमें कहा गया था कि कर्नाटक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (केएसएलएसए) के औचक निरीक्षण के दौरान इलाज के लिए मांड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एमआईएमएस) अस्पताल के एक विशेष वार्ड में भर्ती एक विचाराधीन कैदी सरकारी अधिकारी एक महिला के साथ मिला था।
उन्होंने बताया कि केएसएलएसए की टीम ने 22 अगस्त को एमआईएमएस अस्पताल का निरीक्षण किया था।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान पता चला कि भ्रष्टाचार के एक मामले में विचाराधीन कैदी भूमि अभिलेख सहायक निदेशक (एडीएलआर)-सह-सर्वेक्षण पर्यवेक्षक मोहम्मद हुसैन को एमआईएमएस में भर्ती कराया गया था। वह 21 अगस्त से वहां इलाज करा रहा था।
सूत्रों ने बताया कि उसे अस्पताल में भर्ती कराने के लिए अदालत की कोई अनुमति नहीं ली गई थी और न ही उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि उसे इस तरह के उपचार की जरूरत होती।
भाषा खारी नरेश
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