पणजी, 28 अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30,000 करोड़ रुपये के लेनदेन वाले देशव्यापी साइबर धोखाधड़ी प्रकरण से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के तहत तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
इसके साथ ही मामले में केंद्रीय एजेंसी के पणजी कार्यालय द्वारा की गई गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इससे पहले इस सप्ताह मुंबई के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
सूत्रों के अनुसार, भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत बृहस्पतिवार को हिरासत में लिया गया। पणजी की एक विशेष अदालत ने तीनों को एक सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
ईडी ने 23 अगस्त को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं।
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि उसकी जांच गोवा पुलिस द्वारा नौ जून, 2025 को प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद शुरू हुई। मामला गोवा की एक महिला से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर अपने जाल में फंसाया और 21 मई से दो जून, 2025 के बीच कुछ खातों में 2.60 करोड़ रुपये हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया।
एजेंसी के अधिकारियों ने कहा था कि इस मामले में धन के लेनदेन की जांच जिंस कारोबार, यात्रा और विदेशी मुद्रा से संबंधित संस्थाओं के एक नेटवर्क तक पहुंची। इन संस्थाओं ने 27,850 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग लेनदेन किए थे, जबकि 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे।
इन संस्थाओं के बैंक खातों का संबंध 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की 300 शिकायतों और 163 प्राथमिकी से पाया गया है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक बढ़ता हुआ रूप है जिसमें अपराधी कानून प्रवर्तन अधिकारियों, अदालती अधिकारियों या सरकारी एजेंसियों के कर्मचारियों के रूप में खुद को पेश करते हैं तथा ऑडियो और वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ितों को डराते-धमकाते हैं और उन पर पैसे देने का दबाव डालते हैं।
भाषा शफीक मनीषा
मनीषा