हुब्बली (कर्नाटक), 28 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि उसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पथ संचलन’ में हिस्सा लेने के लिए दो सरकारी स्कूल शिक्षकों को निलंबित करके ‘‘नफरत’’ भरी कार्रवाई की है।
उन्होंने मांग की कि इस कार्रवाई को वापस लिया जाए।
जोशी ने सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों को निलंबित करने के बजाय लापता आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को खोजने पर ध्यान देना चाहिए, जो कर्नाटक लोक सेवा आयोग में बड़े पैमाने पर हुई कथित अनियमितताओं के मामले में वांछित हैं।
जोशी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार लापता हैं। क्या सरकार का काम उन्हें पकड़ना है या आरएसएस की गतिविधियों में भाग लेने के लिए दो शिक्षकों को निलंबित करना है?’’
शिक्षा विभाग ने यादगीर जिले के दो शिक्षकों - गुरुराज जोशी और अन्ना साहेब देशमुख - को आरएसएस के पथ संचलन में भाग लेने के लिए विभागीय जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था।
विभाग का कहना है कि ‘पथ संचलन’ में दोनों की भागीदारी प्रथम दृष्टया कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियम, 2021 के प्रावधानों का उल्लंघन थी।
जोशी ने कहा कि अदालतों ने पहले सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस की गतिविधियों में भाग लेने से रोकने की कोशिशों को खारिज कर दिया था।
भाजपा विधायक महेश तेंगिनकाई ने भी निलंबन की कार्रवाई की आलोचना की।
तेंगिनकाई ने कहा कि आरएसएस एक स्वतंत्र संगठन है और उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘आरएसएस का किसी भी राजनीतिक दल या राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं है। यह एक ऐसा संगठन है जो स्वतंत्र रूप से काम करता है। इसमें हर किसी के लिए शामिल होने का खुला अवसर है।’’
भाजपा विधायक ने कहा, ‘‘भाजपा कार्यकर्ता इसमें (संघ के कार्यक्रम में) शामिल हो सकते हैं, कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं, जद (एस) कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं या किसी भी पद पर रहने वाला व्यक्ति इसमें भाग ले सकता है। इस पर किसी तरह की पाबंदी लगाने का सवाल ही नहीं उठता।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि निलंबन राजनीतिक कारणों से किए गए थे और इन्हें तुरंत वापस लिया जाए।
भाषा शफीक मनीषा
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