अदोनी (आंध्र प्रदेश), 26 अगस्त (भाषा) आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिला स्थित अदोनी के एक तीर्थयात्री ने बुधवार को बताया कि चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ से सड़कें क्षतिग्रस्त होने और रास्ते बंद हो जाने के कारण, आंध्र प्रदेश के कई तीर्थयात्री डारचेन और उसके आस-पास के इलाकों में फंस गए।
निवर्ति रंगनाथ शास्त्री, जो इस समय अपने परिवार के साथ डारचेन में हैं, ने बताया कि उस इलाके में तेलुगु बोलने वाले तीर्थयात्रियों के कई समूह मौजूद हैं लेकिन आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों से आए तीर्थयात्रियों की सटीक संख्या का पता नहीं चल सका।
शास्त्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘उस इलाके में ईशा फाउंडेशन से जुड़े समूह भी मौजूद हैं। हर समूह में कम से कम 150 सदस्य हैं और ऐसे करीब 15 समूह वहां काम कर रहे हैं।’’ कैलाश पर्वत से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित डारचेन, कैलाश परिक्रमा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक अहम आधार स्थल है। प्रभावित इलाका, जिसमें डारचेन और मानसरोवर जाने वाला रास्ता शामिल है, करीब 60 किलोमीटर के दायरे में आता है।
शास्त्री और उनका परिवार 18 अगस्त को काठमांडू पहुंचे और फिर अपनी तीर्थयात्रा के तहत तिब्बत गए। उन्होंने बताया कि वे अभी डारचेन में रुके हुए हैं, जबकि जिस रास्ते से वे तिब्बत गए थे, वह अचानक आई बाढ़ की वजह से बह गया है या बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
शास्त्री ने कहा कि डारचेन में हालात अभी स्थिर हैं, लेकिन तीर्थयात्री वहां से निकल नहीं पा रहे हैं क्योंकि रास्ते बंद हैं। आस-पास की जगहों पर जाने पर भी रोक है और इसके लिए चीनी अधिकारियों से इजाजत लेना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि तिब्बत इलाके में अधिकारियों ने आवाजाही को लेकर बहुत सख़्त नियम लागू कर रखे हैं तथा सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर अस्पष्टता है कि तीर्थयात्री डारचेन से कब और कैसे निकल पाएंगे, क्योंकि रास्ते बंद हैं।
शास्त्री ने बताया कि उनके समूह को तीन दिन की कैलाश परिक्रमा करनी थी। समूह का एक जत्था बुधवार सुबह परिक्रमा के लिए निकल गया, जबकि वह खुद वहीं रुक गए क्योंकि उन्हें ऊंचाई की वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है।
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और माता-पिता भी परिक्रमा पर नहीं गए और डारचेन में ही रुक गए।
उन्होंने बताया कि परिक्रमा पर गए तीर्थयात्रियों के बृहस्पतिवार दोपहर तक लौटने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि उनके लौटने पर ही उनकी स्थिति के बारे में और साफ जानकारी मिल पाएगी।
शास्त्री ने बताया कि डारचेन में उनके साथ परिवार के जो सदस्य रुके हुए हैं, उनमें उनकी 65 वर्षीय मां और 29 वर्षीय पत्नी भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उस इलाके में फंसे तीर्थयात्रियों में कई अन्य महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य आपस में लगातार संपर्क में हैं और एक-दूसरे के पास स्थित होटलों में ठहरे हुए हैं।
शास्त्री ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह फंसे हुए तीर्थयात्रियों की मदद करने और उन्हें सुरक्षित निकालने या वापस लाने के लिए पहल करे।
फंसे हुए तीर्थयात्री उन लोगों के एक बड़े समूह का हिस्सा हैं जो कैलाश पर्वत-मानसरोवर क्षेत्र की तीर्थयात्रा पर गए हैं।
भाषा सुभाष सिम्मी
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