(फाइल फोटो के साथ)
शिलांग, 26 अगस्त (भाषा) मेघालय विधानसभा ने इस पूर्वोत्तर राज्य में यूरेनियम अन्वेषण और खनन के खिलाफ बुधवार को एक प्रस्ताव पारित किया।
मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने यह प्रस्ताव पेश किया जिसका सभी 60 विधायकों ने समर्थन किया। उसके बाद विधानसभा ने ध्वनिमत से उसे पारित कर दिया।
इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार, परमाणु ऊर्जा विभाग और ‘यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड’ से अपील की गयी है कि वे पश्चिम खासी पर्वतीय क्षेत्र में काइलेंग-पायंडेंगसोहिओंग-मावथाबाह (केपीएम) यूरेनियम खनन परियोजना समेत मेघालय में यूरेनियम खनन की अनुमति न दें, खनन का कोई भी काम शुरू न करें, उसे आगे न बढ़ाएं ।
संगमा ने कहा, ‘‘हमने देश के अलग-अलग हिस्सों में यूरेनियम खनन के असर देखे हैं, जहां खनन क्षेत्रों के आस-पास रहने वाले लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ा है।’’
प्रस्ताव पेश करते हुए संगमा ने कहा कि मेघालय में यूरेनियम के बड़े भंडार हैं और राज्य भर में ‘‘केंद्र द्वारा इसके अन्वेषण और खनन से जुड़ी पिछली गतिविधियों का लोगों ने विरोध किया था।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ सरकार, सदन और जनता के रुख को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी। हमें लगा कि एक प्रस्ताव लाया जाना चाहिए ताकि यह संदेश दिया जा सके कि मेघालय, राज्य के लोग, सरकार और निर्वाचित सदस्य किसी भी तरह के यूरेनियम खनन या प्रसंस्करण का विरोध करते हैं। ’’
उन्होंने 2019 के शीर्ष अदालत के एक फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि मेघालय में भूस्वामियों का जमीन की ऊपरी सतह और जमीन के नीचे की मिट्टी (जिसमें खनिज भी शामिल हैं) दोनों पर अधिकार है।
संगमा ने कहा कि पश्चिम खासी पर्वतीय और दक्षिण पश्चिम खासी पर्वतीय क्षेत्र में यूरेनियम वाले खनिजों की पहचान की गई है, जहां केपीएम परियोजना के तहत ‘ओपन-कास्ट’ खान और अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजना वाले इलाके में बहुत ज्यादा बारिश होती है, जमीन का ढलान बहुत ज़्यादा है और वहां भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि यह इलाका उन झरनों और नदियों के लिए पानी का स्रोत (कैचमेंट) है, जिन पर पीने का पानी, खेती और लोगों की आजीविका निर्भर करती है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि पारंपरिक संस्थाओं, ज़िला परिषदों, छात्र और नागरिक समाज संगठनों तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों ने मेघालय में यूरेनियम खनन का ‘लगातार विरोध’ किया है, जबकि प्रभावित समुदायों की ठीक से सहमति नहीं ली गई है।
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश